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बेहतर हो जाएगा दैनिक जीवन, इस उम्मीद से गए थे मिली मौत काहे का विकसित भारत, किसके लिए बड़ी अर्थव्यवस्था
Tuesday, 02 Jul 2024 18:00 pm
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बिलासपुर, 3 जुलाई 2024।
2 जुलाई को जब लोकसभा में देश के प्रधानमंत्री ने अपना भाषण जो वे राष्ट्रपति के अभीभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर दे रहे थे। भाषण शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश हाथरस बाबा हरि साकार द्वारा मानव मंगल मिलन, सद्भावना, समागम का हादसा हो चुका था। और एक दर्जन से ज्यादा मौत की सूचना आ चुकी थी। ऐसा संभव ही नहीं है कि देश के सबसे बड़े पावर सेंटर पीएमओ को यह जानकारी नहीं आई हो। 
1 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष के भाषण में कल 20 बिंदु थे। प्रधानमंत्री के भाषण के पहले लोकसभा अध्यक्ष ने 11 मुद्दों को डिलीट किया बचे 9 मुद्दों पर भी प्रधानमंत्री ने अपने 250 मिनट के भाषण में जवाब नहीं दिया। फिर लौट हाथरस के घटना में जान गंवाने वालों की संख्या 122 होगी अधिकतर लोग गम घुटने से जीवन से हाथ धो बैठे। विकसित भारत में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत के आंकड़े नहीं रखे जाते, कोविड के समय जो मौत हुई थी उसे वक्त लगाए गए आरटीआई आवेदनों के जवाब से यही पता चलता है। 
हाथरस में घटना का कारण जो बताए जा रहे हैं उनमें से एक साकार हरि बाबा के पैर की धूल एकत्र करना भी है। हमारे देश में जब अंग्रेजों के खिलाफ हमारे पूर्वज आंदोलनरत थे उसे समय आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कर्मयोगी नेताओं के पैरों की धूल को देशवासी यादगार बतौर रख लेते थे। उसे धूल से कोई चमत्कार की उम्मीद नहीं की जाती थी। आज 2024 प्रधानमंत्री किस विकसित भारत कहते हैं। तब भी भारत के हजारों लोग कथित हरि साकार बाबा और उन जैसे कई बाबाओं के पैर की धूल एकत्र कर अपने जीवन में नए सवेरे की उम्मीद लगते हैं।
मल्टी स्टार फिल्म काला पत्थर के एक कलाकार रज्जो (नीतू सिंह) की चमत्कारी अंगूठी को याद करिए और अब सोचिए की स्वतंत्र होने के बाद हमारी बुद्धि वैज्ञानिक सोच के लिए कभी तैयार क्यों नहीं होती है। और हम जीवन में अवतार आने की और बदलाव की बात क्यों करते हैं। हमें जैविक प्रधानमंत्री नहीं अवतारी नान बायोलॉजिकल नेतृत्व अच्छा क्यों लगता है। यदि हमारी सोच वैज्ञानिक को होती और तो 8:00 बजे नोटबंदी का सुबह 8:00 बजे तो विरोध कर ही देते एक तुगलकी की आदेश से चमत्कारिक परिवर्तन होगा इसका भरोसा नहीं करते। डबल इंजन की सरकार हो या केवल इंजन की सरकार हो यदि ड्राइवर विवेकशील नहीं है तो चमत्कार छोड़िए दुर्घटना ही होनी है।