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घुसपैठिया बनाम कैडर की लड़ाई भाजपा हुई कमजोर जाति की राजनीति ने भाजपा के सवर्ण वोटर को बैठाल दिया घर पर
Friday, 03 May 2024 18:00 pm
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बिलासपुर, 4 मई 2024।
2024 लोकसभा चुनाव का तीसरे दौर का मतदान 7 मई को होगा, तो कल चुनाव प्रचार का अंतिम दिन रहेगा। बिलासपुर लोकसभा में भी मतदान कम होने की पूरी संभावना है। जिसके पीछे दो कारण है। पहला भारतीय जनता पार्टी की ओबीसी पॉलिसी के चलते मध्यम वर्ग उनमें भी विशेष कर सवर्ण, इस चुनाव में स्वयं को दूर रख रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी का प्रत्याशी ओबीसी साहू वर्ग से आता है और कांग्रेस का प्रत्याशी ओबीसी यादव वर्ग से आता है। 
इस बात पर कोई शक नहीं है यदि भाजपा का बहुमत आया तो स्वयं को ओबीसी बताने वाले मोदी जी ही प्रधानमंत्री बनेंगे। ऐसे में सवर्ण मतदाता स्वयं को मतदान से दूर करता जा रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद से बिलासपुर संभाग में किसी भी सवर्ण को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला पूर्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल में सवर्ण मंत्रियों की तूती बोलती थी। अब ऐसा नहीं है। 
जीएसटी, महंगाई और बेरोजगारी की सर्वाधिक भार मध्यम वर्ग पर पड़ी मध्यम वर्ग का बड़ा हिस्सा विशेष कर सवर्ण आरक्षण के चलते सरकारी नौकरियों से दूर हो चुका है। दोनों राजनीतिक दल आरक्षण रखने के लिए वचनबद्ध हो चुके हैं। ऐसे में सवर्ण वर्ग की कोई रुचि नहीं बची है। मतदान में कुछ युवा मतदाता तो व्यवस्था से ही रुष्ट हैं। पकोड़ा उद्योग, 15 लाख, 2 करोड़ रोजगार जैसे मोदी वचन जो अब जुमले में तब्दील है, से ठगे जाने के बाद इन्हें कांग्रेस पर भी भरोसा नहीं। जाएंगे मत देने तो भारतीय जनता पार्टी की ओर उंगली बढ़ती है और ओबीसी को वोट देना होगा सो मतदान केंद्र की ओर जाना ही नहीं चाहते। 
मतदान कम होने का दूसरा कारण भारतीय जनता पार्टी में गैर भाजपाइयों का प्रवेश ने भाजपा के असली कार्यकर्ता का रासायनिक संतुलन ही बिगाड़ दिया उसे लगता है कि घुसपैठिया बनाम कैडर की लड़ाई यदि कैडर को अपना औचित्य और दबदबा कायम करना है तो, इस बार घुसपैठियों के दम पर ही मतदान होने दो। कैडर वाला तो एकेश्वर वाद के तहत सुबह शाम आरती कर रहा है यह दो बड़े कारण है कि बिलासपुर लोकसभा का चुनाव जिसमे कांग्रेस पहले कमजोर नजर आती थी अब सनय सनय मुकाबले में खड़ी हुई और अब आगे दिखाई दे रही है। एससी मतदाता भाजपा से नाराज चल रहा है। और बिलासपुर लोकसभा , हर विधानसभा क्षेत्र में एसटी मतदाता प्रभावकारी संख्या में है। इसे ओबीसी नेतृत्व कभी स्वीकार नहीं है। सो उन्हें भी वोट देने के पहले यह देखना है कि संस्कृति, जल, जंगल, जमीन किसके आने पर सुरक्षित रहेगी।