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24hnbc पुलिस की धीमी रफ्तार करती है संदेह की ओर इशारा
Thursday, 08 Feb 2024 18:00 pm
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बिलासपुर, 9 फरवरी 2024।
सरकार यह हो या वह हो पुलिस की कार्य प्रणाली पर कोई अंतर नहीं पड़ता यहां अभियुक्त गणों में कोई बृजभूषण नहीं है उसके बावजूद पुलिस की कुल कार्य प्रणाली ऐसी है जैसे कोई अधिवक्ता अपने क्लाइंट को निर्दोष सिद्ध करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दे, रायपुर जिले अभनपुर थाना में 16 -17 नवंबर को एक महिला अपने साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म होने की शिकायत करने थाना पहुंची। पर उसे क्षेत्र अधिकार उसका थाना क्षेत्र का निवासी ना होना जैसे प्रश्नों में उलझा कर वापस भेज दिया गया। एक दिन बाद पीड़िता फिर पहुंच गई इस बार शिकायत ले ली गई। सुबह 12:00 बजे से देर शाम तक कार्यवाही चली पीड़िता फिर वापस गई मेडिकल के लिए मेडिकल के लिए 21 नवंबर को बुलाया गया मेडिकल उपरांत फिर वापस भेजा गया। 1 दिन के अंतर के बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान रिकॉर्ड हुआ। उसके बाद आज तारीख तक गैंगरेप की आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई इस बीच में पीड़ित महिला ने मुख्यमंत्री को अपनी शिकायत भी दी यह शिकायत 5 जनवरी को दी गई है पर कार्यवाही होते नहीं दिख रही।
थाना प्रभारी का कहना है कि शिकायत लिखवाने के उपरांत महिला से संपर्क ही नहीं हो पा रहा है। अभियुक्तों के नाम पता, मोबाइल नंबर सब कुछ पुलिस जानती है। थाना प्रभारी का कहना है कि मामले की जांच के लिए कुछ तकनीकी पड़ताल जारी है इस सब के बीच बड़ा प्रश्न यह उठता है 376 डी का अपराध दर्ज करने के बाद पीड़िता का मेडिकल, मजिस्ट्रेट रियल बयान होने के बाद भी तकनीकी पड़ताल के नाम पर मामले को कितने दिन लंबित किया जा सकता है।
एफआईआर दिनांक के बाद गिरफ्तारी में एक-एक दिन का विलंब आरोपियों को न केवल मदद दे सकता है बल्कि उन्हें यह अवसर भी दे देता है कि वे सामूहिक रूप से या निजी स्तर पर पीड़िता पर दबाव बनाए कि वह अपने शिकायत को वापस ले या ऐसा कोई दस्तावेज निष्पादित कर दे जिससे उन्हें न्यायिक रूप से लाभ प्राप्त हो जाए। ऐसे मामलों में आमतौर पर यह देखा जाता है की सक्षम अभियुक्त मारपीट कर भी समझौता पत्रों पर भी हस्ताक्षर करा लेते हैं। पीड़िता की कोई लोकल गार्जियनशिप नहीं है उसके पति का भी देहांत हो चुका है ऐसे में रोजी-रोटी का संकट भी अतिरिक्त दबाव का कारण बनता है।
अभनपुर पुलिस स्टेशन का यह मामला अपने आप में अजूबा है। महिला स्वयं का पता इसलिए बदलती रहती हैं कि आरोपी उसे ढूंढ कर दबाव न बन सके। और पुलिस यह कहती है की महिला अपने स्थाई पते पर नहीं पाई जाती।