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संविधान प्रदत्त रास्ते से नहीं बदलेगी सत्ता, तो नक्सली सोच को मिलेगा बढ़ावा जागरूकता रक्षात्मक है, ईवीएम के प्रश्नों पर जवाब देने से बचता है राज्य सरकार का महकमा
Tuesday, 30 Jan 2024 18:00 pm
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बिलासपुर, 31 जनवरी 2024।
एक ओर आज़ बिलासपुर में स्ट्रांग रूम से लोकसभा की तैयारी के लिए ईवीएम मशीन निकल रही है साथ ही कंपोजिट बिल्डिंग के दरवाजे के पास प्रशिक्षण/जागरूकता के तहत ईवीएम मशीन, वीवीपैड, और कंट्रोल यूनिट को एक ही टेबल पर रखकर आम नागरिकों को बताया जा रहा है कि मशीन कैसे कम कर रही है। जिस राज्य में लाखों नागरिकों ने अभी 2 महीने पूर्व ही मतदान किया है उन्हें फिर से जागरूक करना संकेत दे रहा है कि निर्वाचन आयोग अपनी मशीनों को लेकर अब डिफेंसिव मोड में है। रही सही कसर चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भाजपा की धांधली। ईवीएम मशीनों के निर्माण और प्रोग्रामिंग में संलग्न कंपनियों के स्वतंत्र निदेशक के रूप में ऐसे लोगों की नियुक्ति जो सीधे तौर पर भाजपा के संगठन से जुड़े हुए हैं के खुलासे के बाद अब मतदाताओं को यह साफ समझ आ रहा है कि निर्वाचन आयोग और भाजपा सरकार के बीच जिला स्तर से लेकर केंद्र तक आपसी समझौता है। यदि सत्ता परिवर्तन के लिए मतदाताओं को संविधान में जो रास्ता दिया है उसे ही हाईजैक कर लिया जाएगा तो नागरिक संवैधानिक तौर पर प्रदत्त सत्ता परिवर्तन के अधिकार से वंचित हो जाएंगे। और फिर सत्ता परिवर्तन करने के लिए वैकल्पिक मार्ग क्या होगा ? ऐसा लगता है कि सरकार और निर्वाचन आयोग मिलकर नागरिकों को नक्सली सोच की ओर धकेल रहे हैं। ऐसे में नक्सली सोच बढ़ाने का दोष भी स्वतंत्र मीडिया पर धकेल दिया जाएगा। कुल मिलाकर भारत का लोकतंत्र भारतीय जनता पार्टी के द्वारा हाईजैक किया जा रहा है। और यह सब कुछ उजागर हो जाने के बाद जिला स्तर पर बैठे अधिकारी ईवीएम मशीन पर संदेह पर कोई जवाब न देकर इसे निर्वाचन आयोग की विषय वस्तु बताते हैं। जबकि असल बात यह है निर्वाचन आयोग का अपना कोई स्टाफ भारत में नहीं होता, उनके लिए राज्य सरकार के कर्मचारी ही काम करते हैं पर जनता के प्रति जवाब देही से बचते हैं।