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पुलिस स्टेट की ओर तेजी से बढ़ता भारत भारतीय न्याय संहिता जैसे-जैसे पता चलेगा प्रावधान का और होंगे आंदोलन
Tuesday, 02 Jan 2024 18:00 pm
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बिलासपुर, 3 जनवरी 2024।
हिट एंड रन धारा 104 के विरोध में ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल केवल उनकी अपनी नहीं हर उसे व्यक्ति के लिए जो वहां चलना है। हाल ही में पूरे दंड विधान को नए नाम न्याय संहिता के रूप में बदल गया है। जिस पर राष्ट्रपति की मोहर लग चुकी है। समय रहते यदि भारत के नागरिकों को व्हाट्सएप ज्ञान से मुक्ति मिल जाए और सही स्थान पर पढ़ने मिले तो उन्हें यह भी पता चलेगा कि अभी तक कोई एफआईआर होने के बाद पुलिस हिरासत अधिकतम 15 दिन की होती थी। कोई भी न्यायालय पुलिस को कभी भी एक साथ 15 दिन की हिरासत नहीं देता था। पर अब ऐसा नहीं है पुलिस हिरासत की अवधि 60 और 90 दिन है आप कल्पना करें हमारे देश की पुलिस कितने बरबर तरीके से जांच करती है। और पूछताछ के तरीके कितने अमानवीय हैं। अभी हाल ही में जम्मू कश्मीर में सेना की हिरासत में तीन युवाओं की मौत हुई है। मृतकों के साथ हिरासत में क्या व्यवहार किया जा रहा था मृतकों के परिजनों के बयान से पता चलता है। मानवीय गरिमा शर्म से आंख नीचे कर ले, एक उदाहरण छत्तीसगढ़ का भी सुने।
मानव अधिकार कार्यकर्ता सोनी सोरी ने पुलिस हिरासत के दौरान जो प्रताड़ना सही और एक आईपीएस अधिकारी पर जो आरोप लगाए उन्हें पढ़ने के बाद यह पता चलता है कि पुलिस की पूछताछ मानवता को शर्मसार कर देने वाली होती है ऐसे में पुलिस हिरासत की अवधि 15 से 60 दिन बदलना और उसे न्याय कहना कहीं से भी उचित नहीं है। जैसे-जैसे भारतीय न्याय संहिता के खुलासे होंगे नागरिकों को पता चलेगा कि जिस सरकार को अच्छे दिन लाने के नारे से प्रभावित होकर उन्होंने चुना वे तो काले दिन ला रहे हैं। धारा 104 हिट एंड रन में 10 साल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में जमानत मिलना भी कठिन हो जाता है जबकि दर्जनों बार न्यायालय ने जमानत रूटिंग है जेल अपवाद है पर ऐसा अपराध जिसकी सजा 10 साल हो में उपस्थित होते ही जमानत नहीं दी जाती जज के हाथ भी बंधे हुए हैं। ऐसी धारा जिसके तहत सजा 7 साल से कम है जमानत आसान है पर 7 साल से अधिक की सजा वाले मामलों में जमानत कठिन है पर अब यही सच्चाई है।