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ओबीसी-ओबीसी अलाप से अपर कास्ट छिटक गया कांग्रेस से लोकसभा सीट जो देगा हाई कमान के झोली में वही बनेगा छत्तीसगढ़ का नया सीएम
Thursday, 30 Nov 2023 18:00 pm
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बिलासपुर, 1 दिसंबर 2023।
30 नवंबर शाम 5:00 बजे के बाद एग्जिट पोल का ढोल बजने लगा और यह ढोल 3 दिसंबर दिन रविवार मतगणना शुरू होने के वक्त तक बजता रहेगा। बिहार विधानसभा चुनाव याद करें कैसे लाल यादव की पार्टी जीत रही थी और अंत में उन विधानसभा क्षेत्र में खेल हुआ जहां हर जीत 500 से 1000 के भीतर हो रही थी। ऐसी स्थिति जहां कहीं भी आती है वहीं के लिए एग्जिट पोल का माहौल सरकारी अधिकारियों के लिए बनाया जाता है। विशेष कर पोस्टल बैलट पांच राज्यों के इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के फेस वैल्यू एक ही स्थान तेलंगाना में लगी शेष स्थानों में तो वहां के छत्रप मध्यप्रदेश में कमल नाथ, छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल, राजस्थान में अशोक गहलोत को फ्री हैंड दिया गया था।
कांग्रेस के लिए इन राज्यों में सत्ता बचा लेन जा जीत कर आ जाना से महत्वपूर्ण यह है कि इन राज्यों से कांग्रेस के नेता अपने हाई कमान को लोकसभा चुनाव में क्या देंगे। क्योंकि 3 दिसम्बर के बाद लोकसभा चुनाव के लिए केवल 6 महीने ही निकलते हैं अप्रैल के पहले सप्ताह में फिर से आचार संहिता घोषित हो जाएगी। एग्जिट पोल का विश्लेषण जो इशारा कर रहा है वह कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। कांग्रेस के बड़े नेता ने जातिगत मतगणना पर खूब बयान दिये है। मतदान और उसका विश्लेषण यह इशारा कर रहा है की ओबीसी वोटर बटा है। और अपर कास्ट का वोटर भाजपा की ओर गया। इसका सीधा अर्थ है कांग्रेस के नेताओं ने सनातन धर्म को लेकर जो आचरण पिछले 1 साल से अपना रखा है के बावजूद अपर कास्ट को कांग्रेस के ओबीसी नीति के कारण अभी परहेज नहीं बेहतर समझ आया। अपर कास्ट के वोटर में बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है जो धर्म को लेकर खुले विचार रखते हैं, पर कांग्रेस के ओबीसी पॉलिटिक्स के चलते हुए भाजपा को वोट देना पसंद करते हैं।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बंपर बहुमत नहीं मिलेगा कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची जारी होने के दिन से हम छत्तीसगढ़ में 38 सीट हार रही है स्पष्ट कहते हैं हारने वाली सीटों के नाम भी बताते हैं ऐसे में 3 तारीख के निर्वाचन प्रमाण पत्र लेने के बाद जीते हुए कांग्रेस विधायक अपना नेता किस चुनेंगे। कांग्रेस की परंपरा है सब विधायक हाई कमान को एक लाइन का समर्थन देंगे ऐसे में हाई कमान के ऊपर यह जिम्मेदारी होगी कि मुख्यमंत्री चुनने का मानदंड पहला लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की झोली में कितने लोकसभा सीट देगा नहीं तो अपनी सरकार बचा लेना छत्तीसगढ़ में विशेष उपलब्धि नहीं है। ‌ साथ में यह भी देखें की 2018 के समान बंपर बहुमत भी नहीं मिलेगा। और ओबीसी का राग अलापने मात्र से काम नहीं चलेगा एसटी आरक्षित सीट, एससी आरक्षित सीट लोकसभा में कांग्रेस को यदि जितनी है तो उसे एक संतुलन वाला रवैया अपनाना पड़ेगा। अन्यथा छत्तीसगढ़ में लोकसभा सीट 11 में से 1 या 2 कांग्रेस की जीत यही परिपाटी है। जो मुख्यमंत्री इस परिपाटी के तिलिस्म को तोड़ेगा वही हाई कमान का चाहता होगा।