24 HNBC News
24hnbc विधानसभा चुनाव नहीं यह है सामाजिक चुनाव
Monday, 06 Nov 2023 18:00 pm
24 HNBC News

24 HNBC News

24hnbc.com
बिलासपुर,7 नवंबर 2023।
वर्ष 2023 का यह चुनाव विधानसभा का नहीं सामाजिक चुनाव के रूप में तब्दील हो गया है ऐसा हम काफी सोच विचार के बाद का रहे हैं। जाति जनगणना प्रत्याशी चयन में उसकी जाति का महत्व धीरे-धीरे विधानसभा चुनाव को राजनीतिक दलों के बीच नहीं समाज वर्ग के बीच का चुनाव बना रहा है। जिस प्रत्याशी को टिकट दी गई है वह किस समाज का है उसे समाज के कितने वोट हैं अन्य समाज उसे प्रत्याशी के लिए कितने सकारात्मक हैं। आदि इतने महत्वपूर्ण हो गए हैं की बिलासपुर जिले में बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर, बिलासपुर, बेलतरा का चुनाव सामाजिक प्रस्थितिकी पर अग्रसर हो गया है। बिलासपुर, बेलतरा, तखतपुर में ब्राह्मण समाज के मतदाता अंडर करंट के साथ जुड़ते चले जा रहे हैं। उनके बीच मारवाड़ी बाहरी और शोषण के रूप में देखा जा रहा है बिलासपुर कांग्रेस का प्रत्याशी उन्हें नरम दल और बेलतरा भाजपा का प्रत्याशी गरम दल की सुविधा प्रदान कर रहा है। तीसरा तखतपुर में उन्हें लगता है कांग्रेस का प्रत्याशी ब्राह्मण ठाकुर और महिला का गुलदस्ता है ऐसे में बरसों बरस बाद ब्राह्मण समाज को यह मौका मिला है कि जिले में ब्राह्मणों का राजनीतिक वर्चस्व फिर से स्थापित किया जाए। और वह पार्टी स्तर से ऊपर उठकर सामाजिक स्तर पर वोट करने का मन बनाते हैं। बिल्हा में मुकाबला कुर्मी प्रत्याशियों के बीच है कुर्मी समाज का वोट बटेगा ऐसा कहा जाता है पर यह सत्य नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी का उन्हीं के समाज में विरोध है। कारण सामाजिक चुनाव में उन्होंने सामाजिक नेताओं की अनसनी की और अपनी मर्जी थोपने की कोशिश की। ओबीसी के अन्य वर्ग भी भाजपा प्रत्याशी की डिक्टेटरशिप से परेशान है और ऐसे प्रत्याशी को वोट देने की मानसिकता बना रहे हैं जो सबको साथ लेकर चले जरूरत पड़ने पर जिसे सुनाई जा सके इन दो गुण पर भाजपा का प्रत्याशी खड़ा नहीं उतरता है। साथ ही क्षेत्र के मतदाताओं को सवनी का पूर्व आतंक भी बताया जाता है कहा जाता है कि भाजपा प्रत्याशी को जीतने का अर्थ इनका आतंक दोबारा स्थापित करना है। कहा जाता है कि बिल्हा क्षेत्र में भाजपा के शासन के समय मोरम खदान, पत्थर खदान, राइस मिल हर जगह सवनी टैक्स के बगैर काम नहीं हो सकता था। राजस्व न्यायालय में भी सड़क बाबा की ही चलती थी ऐसे में एक बार तुम एक बार तुम चला तो भाजपा का प्रत्याशी बिल्हा में पिछड़ता नजर आ रहा है। जोगी कांग्रेस से भाजपा की दोस्ती भी भले ही कहानी हो पर भाजपा को नकारात्मक जा रही है। मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक गणित अलग किस्म से कम कर रहा है मस्तूरी मतदाता की दृष्टि से सबसे बड़ा क्षेत्र है यहां पर 3 लाख से अधिक मतदाता है पर सबसे बड़ा मुद्दा। श्रमिको का पलायन पर दोनों राजनीतिक दल के प्रत्याशी अपना मुंह बंद कर लेते हैं।
कोविड के समय श्रमिकों की वापसी का आंकड़ा बताता है कि 2,5,10000 नहीं पूरे 64000 श्रमिक मजदूरी ब्लॉक में ही वापस आए थे। ऐसे में हार जीत इन्हीं के हाथ में है। दोनों नेता पलायन पर चुप हो जाते हैं इसके पीछे कोई गहरा राज है। श्रमिकों के पलायन का समीकरण कोई भाजपा के पक्ष में बताता है तो कोई इसके पीछे कांग्रेसी हाथ बताता है पर यह समीकरण लेबर सरदार और उनके द्वारा बांटे जाने वाली धनराशि से जुड़ा है। इस महीने और अभी भी उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, पंजाब से लगातार श्रमिकों की वापसी हो रही है। बताया जाता है कि यह दीपावली मनाने नहीं 17 तारीख का मतदान त्यौहार मनाने आ रहे हैं। मस्तूरी में अलग-अलग मजरा टोला में इन दोनों बोकरा भात और दारू पार्टी शुरू हो गई है। मस्तूरी क्षेत्र से श्रमिकों के पलायन पर सामाजिक कार्यकर्ता पाटले का कहना है कि ब्लॉक में खनिज है, नदी है, जमीन है , खदान है एट भट्ठा है पर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार नहीं है। और इस विषय को कोई उठाता भी नहीं है। ऐसे में चुनाव के समय यह 64000 श्रमिक पलायन करने वाले मतदाता जीत हार में बड़ी भूमिका अदा करने वाले हैं।