हाई कमान को कौन देगा सही जानकारी भाजपा वाली बीमारी लग गई छत्तीसगढ़ कांग्रेस को
Wednesday, 11 Oct 2023 00:00 am
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बिलासपुर, 11 अक्टूबर 2023।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हार का सीधा संबंध आरक्षित सीट से होता है। उसके बाबजूद कांग्रेस ओबीसी राजनीति में इस तरह डूब रही है कि उसे एसटी और एससी सीट पर प्रत्याशी खोजने का चुनने का तरीका ही नहीं मिल रहा या दिल्ली में बैठे कांग्रेस के रणनीतिकार प्रदेश के मुखिया की चालबाजी को समझ ही नहीं रहे हैं।
कुछ माह पूर्व ही हाईकमान ने छत्तीसगढ़ में अपने प्रदेश प्रभारी को बदला यहां भी संतुलन बनाने की दृष्टि से प्रदेश अध्यक्ष को भी बदल दिया गया तब भी यही बात सामने आई थी कि मोहन मरकाम प्रदेश अध्यक्ष संगठन के मामलों में अपना निर्णय स्वयं लेते हैं । और मुखिया को तब ही लग गया कि विधानसभा प्रत्याशी चयन के समय प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम उनकी राह में कांटे ही डालेंगे या पार्टी का सच में हितैषी बनेंगे।
एक तेरा एक मेरा की नीति पर पीएल पूर्णिया को बदला गया तो बदले में मोहन मरकाम को नमस्ते कर दिया गया है। नए प्रदेश अध्यक्ष और नए प्रदेश प्रभारी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को अपने स्तर पर हमेशा यह भरोसा दिया कि उनकी भावनाओं का ख्याल रखा जाएगा। पर अब जब असल परीक्षा की घड़ी आ रही है तो कांग्रेस के नेताओं को भी छत्तीसगढ़ भाजपा वाली बीमारी लग रही है। उदाहरण मस्तूरी एससी आरक्षित सीट है। कांग्रेस का प्रत्याशी 2018 के चुनाव में तीसरे नंबर पर था के बावजूद मुख्यमंत्री का चहेता बना हुआ है। इसी तरह एक अन्य जिले में चुनाव में अपना मुंह और पार्टी का मुंह पिटा चुके हैं पार्टी संगठन के बड़े पद पर बैठे होने के बावजूद कई बार अन्य पदाधिकारी से डांट खा चुके, बलौदाबाजार जिले के राजनीति में जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा अस्वीकार कर दिए गए, स्वयं को जिस मोहल्ले का निवासी बताते हैं जिस बूथ में उनके परिवार का मतदान आता है में भी कांग्रेस को जीतने में कामयाब न होने वाले नेता को यही मस्तूरी में पार्टी प्रत्याशी बना दिया जाता है तो भाजपा और कांग्रेस दोनों से चिड़े हुए कार्यकर्ता और मतदाता कोई बड़ी बात नहीं है की बहुजन समाज पार्टी के दाउराम रत्नाकर को जीताकर विधानसभा भेज दें।
अब दूसरा उदाहरण कोरबा संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाला एसटी तानाखार कि बात 2018 में जब रामदयाल उईके ने कांग्रेस को झटका दे दिया तब कांग्रेस के पास यहां कोई प्रत्याशी नहीं था ऐसे में जमीन का कारोबार करने वाले अपने ही आदिवासी समाज के कमजोर लोगों का शोषण करने वाले जमीन दलाल को एक बड़े नेता ने पैसा लेकर टिकट दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका थी। उसे टिकट मिल भी गई कांग्रेस लहर में दल बदलू उईके को सबक सिखाने जनता की ज़िद्द कि यह नेता चुनाव जीत भी गया। विधायक बने जाने के बाद बिलासपुर उसलापुर क्षेत्र में बगैर नियम कानून को पूरा किया एक अस्पताल चलने का आरोप भी इन पर लगता है। जमीन कारोबार के क्षेत्र में इनके द्वारा एक ऐसी डील की गई जिसने ईसाई समाज का कब्रिस्तान ही उन्होंने खरीद डाला इस प्रकरण की शिकायत बिलासपुर के ईसाई समाज के विभिन्न संगठनों ने कलेक्टर बिलासपुर, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन से लेकर कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, पूर्व अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से भी की हुई है। इतने के बावजूद प्रत्याशी चयन की सूची में यह विधायक अभी तक अपने धन बल के कारण उम्मीद लगाए बैठा है।
यदि कांग्रेस में ऐसे कब्रिस्तान चोर को टिकट दे दी तो एक तरफ एसटी समुदाय कोरबा जिले से लेकर नया जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही और बिलासपुर तक नाराज होता है। जिसके कारण इन तीनों जिले की आरक्षित सीट पर कांग्रेस का नुकसान होना तय है।
साथ ही साथ इन तीनों जिले के ईसाई मतदाता जो गांव से लेकर शहर तक में प्रभावी भूमिका रखते हैं काफी वर्षों के बाद बिलासपुर जिले के ईसाई समाज ने 2018 के चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया पर जिस पार्टी के नेता ने उनके समाज का कब्रिस्तान ही खरीद डाला उसके पक्ष में अब कैसे मतदान कर दे।
इन दो उदाहरणों से स्पष्ट हो जाता है कि यदि कांग्रेस के हाई का माने आरक्षित एससी-एसटी पर उचित प्रत्याशी नहीं दिए तो पूरे छत्तीसगढ़ की आरक्षित सीट पर प्रभाव पड़ेगा। मात्र ₹500000 की रकम देकर जैतखंभ की घोषणा से एससी समाज खुश हो जाने वाला नहीं है। इसी तरह अदानी द्वारा तेजी से उजाड़े जा रहे जंगल, जल और जमीन पर कांग्रेस का डबल स्टैंडर्ड आदिवासी समाज के मन में गहराई तक उतरा हुआ है और गलत प्रत्याशी दे देने से उसके जख्म पर मरहम नहीं नमक छिड़कने वाला काम हो जाएगा।