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प्रदेश उपाध्यक्ष से लेकर जिला अध्यक्ष तक लग गए इंटरव्यू की लाइन में यह है भारत जोड़ो के बाद बदली हुई कांग्रेस
Friday, 22 Sep 2023 18:00 pm
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बिलासपुर, 23 सितंबर 2023।
कांग्रेस हाई कमान को इस मुद्दे पर बधाई दी जानी चाहिए कि उन्होंने पार्टी में व्हीआईपी कल्चर इस गलीचे पर तो खत्म किया। जिसे टिकट लाना कहते हैं कैबिनेट मंत्री को छोड़ दें तो कैबिनेट दर्जा प्राप्त, जीता हुआ विधायक, जीता हुआ महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष और त्रिस्तरीय पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधि से लेकर साधारण कार्यकर्ता भी इंटरव्यू की लाइन में खड़ा हो गया। जब आवेदन देने की बात आई और पैनल ब्लॉक और जिला स्तर पर बनने की बात आई तब कथित व्हीआईपी नेताओं को लगा था कि वह अन्य से कुछ अधिक हैं। 
कोई दावेदार प्रदेश उपाध्यक्ष था तो कोई जिला ग्रामीण अध्यक्ष जिन्होंने आवेदन पत्र लिए रिकमेंडेशन के साथ पैनल बना के नाम आगे बढ़ाया और जमकर मनमानी की अब स्वयं इंटरव्यू की लाइन में लगे हैं। इतने के बावजूद संगठन पद का छोड़ने की हिम्मत नहीं होती, पार्टी के बड़े पदाधिकारी ने समय-समय पर स्पष्ट संकेत दिए हैं टिकट चाहिए, टिकट का दावा कर रहे हैं तो संगठन का पद छोड़ दें। पर लालच है जाता ही नहीं। पता है टिकट नहीं मिलेगा तो कम से कम पार्टी का प्रोटोकॉल तो मिला रहे।
बिलासपुर जिले की मस्तूरी विधानसभा सीट पर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष डॉ. जायसी ने प्रत्याशी बनने का आवेदन दे रखा है। कही का भी किसी भी स्तर का कार्यक्रम हो उन्हें अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से गहन मंत्रणा का अवसर मिल ही जाता है। ऐसा फोटो और ट्वीट करके यह स्वयं कहते हैं। सोशल मीडिया के जरिए दीवाल पोतू इन नेताओं ने अपना अपना टिकट पक्का मान लिया है। एक सामान्य व्यक्ति का जितनी धनराशि से घर बन जाए उससे कहीं अधिक धनराशि तो इन नेताओं ने अपने विधानसभा क्षेत्र में वॉल पेंटिंग में खर्च कर दिए हैं।
उन्हें तब लगा होगा की टिकट की दौड़ आसान रहेगी वॉल पेंटिंग की चकाचौंध से आने वाले पर्यवेक्षक ग्लैमर देखकर ही टिकट फाइनल कर देंगे। पर इन्हें यह पता ही नहीं रहा की भारत जोड़ो यात्रा के बाद कांग्रेस पूरी तरह बदल चुकी है। और बड़ा से बड़ा नेता हो उसे लाइन में तो लगना ही होगा और यही दृश्य आज कांग्रेस भवन में दिखाई दिया। पद छोड़ने का इशारा आज का नहीं है 3 माह पूर्व का है पर इन पर अमल करना कोई नहीं चाहता कुर्सी को, पद को छोड़कर आम नागरिकों के बीच जाने की हिम्मत का नाम राहुल गांधी है, केवल नाम राहुल रख लेने से यह जज्बा नहीं आ सकता। 
दिखावटी मस्तूरी से जोंधरा जोड़ो यात्रा की मार्केटिंग कितनी भी कर ली जाए पर उसकी सच्चाई सब जानते हैं। विधानसभा का प्रत्याशी बी फार्म चाहिए पर संगठन का पद छोड़ने की हिम्मत नहीं होती यदि छोड़ दे तो बाईट लेने आने वाले पत्रकार आना ही बंद कर देंगे, तब मीडिया में छाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। यह लालच है कि पद छूटता ही नहीं इसी चक्कर में स्थानीय और बाहरी जैसे मुद्दे बनवाये जा रहे हैं। जिनकी असलियत सब जानते हैं।