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24hnbc जिले की राजनीति बिलासपुर या बेलतरा कहां से होगी संचालित समझले बिलासपुर की जनता
Monday, 18 Sep 2023 18:00 pm
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बिलासपुर, 19 सितंबर 2023।
पहले मध्य प्रदेश और फिर छत्तीसगढ़ में बिलासपुर जिले की राजनीति की धुरी बिलासपुर विधानसभा से थी। और यहां से उठने वाली लहर पहले मध्य प्रदेश भोपाल तक और छत्तीसगढ़ में संपूर्ण छत्तीसगढ़ को प्रभावित करती थी। सरकार चाहे कांग्रेस की रहे या भारतीय जनता पार्टी की बिलासपुर विधानसभा की राजनीति को धुरी को किसी ने ना तो बदलने की कोशिश की ना ही इस छेड़ा पर अब इस दिशा में कांग्रेस के ही कुछ नेता अपने पूर्व भाजपाई मित्रों के साथ मिलकर इस दिशा में प्रयास करते नजर आ रहे हैं और इसके लिए उन्होंने समावेशी राजनीति का सहारा लिया सब जानते हैं छत्तीसगढ़ में पहले एसटी राजनीति और पिछले 10 साल में ओबीसी राजनीति का समीकरण चल रहा है। इसे तोड़ा नहीं जा सकता पर बिलासपुर में राजनीति की धुरी को बदलकर या बिगाड़ कर बेलतरा शिफ्ट किया जा सकता है और यही प्रयास इन दिनों चल रहा है। पिछले दो वर्ष की राजनीति पर नजर डालें 2018 के चुनाव में जैसे ही बिलासपुर विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी हारी और बिलासपुर में एक नए नेता नए चेहरे का उदय विधायक शैलेश पांडे के रूप में हुआ कांग्रेस के कई पुराने नेता और भाजपा के हारे हुए विधायक को राजनीति की डगर कठिन लगने लगी। बिलासपुर का इतिहास कहता है उसने जिसे छून लिया उसका जितना एक बार का नहीं होता यदि यह परंपरा जारी रहती है तो भाजपा के एक नेता और कांग्रेस के कई नेताओं को राजनीतिक सेवानिवृत्ति हो जाएगी और दोबारा बिलासपुर विधानसभा की राजनीति में उन्हें मुख्य भूमिका निभाने का अवसर नहीं मिलेगा। इन्हीं सब ने मिलकर बेलतरा को राजनीति का मुख्य मंच बनाने की ओर काम किया । 2018 के चुनाव में बिलासपुर जिले से दो ब्राह्मण कैंडिडेट घोषित रूप से मिले और एक प्रत्याशी कांग्रेस ने ठाकुर ब्राह्मण महिला के समीकरण में दिया। भारतीय जनता पार्टी ने महिला और ब्राह्मण के समीकरण से काम चलाया। कांग्रेस का समीकरण त्रिभुज वाला काम कर गया बिल्हा में कांग्रेस का ब्राह्मण उम्मीदवार इस बुरी तरह से हार की उनको दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने पर आम मतदाता को घोर आश्चर्य होगा। यहीं से बेलतरा की राह निकाली छत्तीसगढ़ ब्राह्मण को समावेशी राजनीति की दृष्टि से एकत्र किया जा रहा है इसमें मुख्य चेहरे मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार और एक अन्य सवर्ण चेहरा कायस्थ समाज से दिखाई देता है। राजनीति में कायस्थों की भूमिका प्रभावशाली है पर मतदाता प्रतिशत की दृष्टि से वे सीधे टिकट क्लेम नहीं कर सकते ऐसे में ब्राह्मण वर्ग को साथ लेकर टिकट का दवा पुख्ता किया जा रहा है। यह चुनौती ओबीसी वर्ग के लिए जो बेलतरा में बेहद प्रभावशाली है। कांग्रेस हो या बीजेपी ओबीसी वर्ग को यदि अपनी राजनीति को लंबा करना है तो यही सही समय है जब उन्हें एक होना पड़ेगा। इतना ही नहीं बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के लिए यह बड़ा सवाल है कि उनकी राजनीतिक धुरी को कांग्रेस भाजपा के कुछ नेता बदलकर बेलतरा शिफ्ट कर रहे हैं और यदि यह हो गया तो भविष्य में बिलासपुर विधानसभा सीट का विधायक हमेशा कमजोर रहेगा और इस समीकरण का उत्तरदाई कहीं ना कहीं छत्तीसगढ़ में ओबीसी राजनीति का जनक बनेगा।