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प्रश्न माला से फेल पास इसे कैसे कहें उच्च शिक्षा..... ? विश्वविद्यालय में शिक्षा माफिया
Friday, 25 Aug 2023 18:00 pm
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बिलासपुर, 26 अगस्त 2023।
 छत्तीसगढ़ में सरकार चाहे बीजेपी की रही हो या कांग्रेस की बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय ने कभी भी अपने नाम के अनुरूप शिक्षा का स्तर प्राप्त किया ना ही उसके कर्मधारो ने इसे विश्वविद्यालय बनाने की कोशिश की यही कारण है कि इसके अंतर्गत आने वाले दर्जनों कॉलेज और अध्यनरत लाखों छात्र-छात्राओं उच्च शिक्षा का अध्ययन प्रश्न माला पढ़कर फेल पास हो जाता है। यदि पिछले 15 वर्षों के प्रश्न पत्रों और एक विशेष प्रकाशन की 20 सीरीज पर शोध प्रबंध कर लिया जाए तो एक छात्र की एचडी का निष्कर्ष यही निकलेगा की विश्वविद्यालय के तमाम प्रश्न पत्र हल करने के लिए एक विशेष प्रकाशन की प्रश्न माला पढ़ लेना पर्याप्त है। इतना ही नहीं जब पीएचडी करने वाला पानी में गहरे में जाएगा तो उसे गुरुओं की औकात माला कैसे तय करता है का भी पता चल जाएगा। मामला केवल प्रोफेसर, लेक्चरर, डिन, एचओडी का ही नहीं है कॉलेज के प्राचार्य और उसके द्वारा लाइब्रेरी के लिए खरीदी जाने वाली किताबें भी दू्र्भी संधियों का मकड़ जाल दिखाई देगा।
विश्वविद्यालय और कॉलेज में इस गंदगी को प्रवेश करने में कोचिंग संस्थानों के डायरेक्टरों का बड़ा हाथ है। छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में साथ ही अटल यूनिवर्सिटी के भवन में भ्रमण करने के बाद यदि सामने वाला कोचिंग संस्थानों में कभी आना-जाना किया है तो उसे तत्काल याद आएगी की कौन सा चेहरा पूर्व में किसी कोचिंग का डायरेक्टर था।
छत्तीसगढ़ में प्रश्न माला का इतिहास मध्य प्रदेश से चला आ रहा है शिक्षा माफिया की जो जड़ें पाठ्य पुस्तक निगम मध्य प्रदेश, हिंदी ग्रंथ अकैडमी मध्य प्रदेश में गहरे तक जाती थी। उसी की ग्राफ्टिंग पद्धति रायपुर से लेकर कुम्हारी तक छत्तीसगढ़ में प्रत्येक विश्वविद्यालय में कॉलेज में पिछले 25 वर्षों से पुष्पित और पल्लवित हो रही है। इस 25 वर्ष में जितने भी मंत्री आए गए किसी की यह हैसियत नहीं हुई की माला के धंधे को बंद कराकर राज्य के विश्वविद्यालयों को शोध परिसर में तब्दील करें।
यही कारण है कि अंत में भरोसे वाले सीएम ने प्रश्न माला से पास होने वाले फेल होने वाले होनहार छात्रों को बेरोजगारी भत्ते के काबिल मान लिया और अब यही युवा मतदाता अपने प्रीविपर्स की लालच में सरकार चुनेगा। इतना ही नहीं माला को यदि तोड़ा ना गया तो वह दिन दूर नहीं जब बेरोजगारी भत्ता का कोई पात्र राज्य का उच्च शिक्षा मंत्री बन जाएगा और प्रशासन उसे सलामी ठोकने लगे।