24hnbc मणिपुर के पहले पीएम ने याद किया छत्तीसगढ़ याद रखें हमारा राज्य जाति हिंसा से बाल बाल बचा है
Friday, 21 Jul 2023 18:00 pm
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बिलासपुर, 22 जुलाई 2023। देश की संसद चल रही थी और प्रधानमंत्री मणिपुर में 75 दिनों से जारी हिंसा पर सीढ़ियों यों में खड़े होकर बोले इसका कारण इतना है कि उन्होंने जब महिलाओं के साथ हिंसा में छत्तीसगढ़ और राजस्थान को घसीटा तो वे अपने टूलकिट संदेश को संसद के रिकॉर्ड में नहीं आने देना चाहते, प्रधानमंत्री के वक्तव्य के बाद ही भाजपा की आईटी गैंग राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और भारत के हर उस राज्य में हुई इक्का-दुक्का घटनाओं को ढूंढ ढूंढ कर दिखाने लगी जहां पर भाजपा का शासन नहीं है। हम विशेष तौर पर छत्तीसगढ़ की बात करेंगे छत्तीसगढ़ में 2003 के बाद लंबे समय भारतीय जनता पार्टी का शासन रहा। और उस दौरान छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से निपटने के लिए भाजपा के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री छत्तीसगढ़ में जो नीति अपनाई उसे आज फिर से याद कराने की जरूरत है नागरिकों के बीच हथियार बांट कर उन्हें ही आपस में लड़वाना का काम भाजपा ही कर सकती है। तब इसे नाम दिया गया सलवा जुडूम पति तो यह थी कि सलवा जुडूम की आड़ में करोड़ों रुपए का हेरफेर भी किया गया क्योंकि नक्सलवाद को नियंत्रित करने के लिए जो रकम केंद्रीय से मिलती है उसकी कोई वित्तीय लेखा-जोखा नहीं बनता सभी डॉक्टर रमन के विशेष चहीते आईपीएस अधिकारियों ने जंगल के अंदर भारतीय संविधान को ताक पर रखकर मनचाहा वो काम किया जो कहीं से भी कानूनन रूप से जायज नहीं था ऊपर से सत्ता का संरक्षण इतना कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर भी जब कभी कोई टीम आई तो उसे वास्तविक घटना स्थल तक पहुंचने नहीं दिया गया। ऐसा व्यवहार मानव अधिकार कार्यकर्ता और तो और सीबीआई के साथ भी किया गया कौन नहीं जानता कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर ही सलवा जुडूम समाप्त हुआ अन्यथा छत्तीसगढ़ को जिस तरह से जाती हिंसा के गर्त मे धकेला जा रहा था, उसे कुछ ही लोग समझ रहे थे। छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर से कुछ दूर 19 तारीख की एक घटना है एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका पर अन्य पुरुष से संबंध की शंका में उसकी गला घोट कर हत्या कर दी महिला के मृत शरीर को फंदे पर लटका कर आत्महत्या का स्वरूप देने का प्रयास किया सफल न होने पर गड्ढा खोदकर उसे दफन कर दिया उसका मोबाइल नहर में फेंक दिया संबंधित थाने में गुम इंसान कायम हुआ जीरो में नहीं पुलिस ने 20 तारीख को ही शव बरामद कर लिया और शाम होते-होते घटना के आरोपी हत्यारे प्रेमी को हिरासत में ले लिया। ऐसी व्यवस्था को मणिपुर के कांड से तुलना करना भी गलत है। छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे प्रदेशों को अब बहुत ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि प्रधानमंत्री के इशारे पर टूलकिट पर पालन प्रतिवेदन लिया जाने लगेगा जब कभी भी चाणक्य और उनके सहयोगी जिस भी प्रदेश में जाएंगे घटना की आशंकाएं बढ़ जाएगी महिलाएं हिंसा का शिकार होने नहीं मिली तो पुरुषों को शिखा पढ़ाकर आंदोलन के लिए कपड़ा उतार कर दौडाने की व्यवस्था हो सकती है प्रधानमंत्री के सीढ़ी वाले बयान को फिर से सुन ले उन्होंने 4 मई की मणिपुर घटना को पाप कहां यह शब्द बताता है कि वक्त आने पर पापी को क्षमा दी जा सकती है और कह दिया जाएगा पाप से घृणा करो पापी से नहीं दरअसल सत्ता पाना और उसे हमेशा वर्चस्व के साथ हमेशा अपने पास रखना ऐसी नीति रखने वाले कभी लोकतांत्रिक हो ही नहीं सकते। पूरे इंडिया में गुज्जू मॉडल लागू करने के लिए नीतियां बनाना षड्यंत्र रचना जबरदस्ती करना अपना कुर्ता पहन आने के लिए बाध्य करना ना पहनने वाले का कपड़ा फाड़ देना आदि हम देख रहे हैं और यदि हमने नफरत के बाजार में एक भी सुख की तो जंगल नहीं बीच शहर में ऐसी घटनाएं होंगी जैसी मणिपुर में हो रही है। कौन नहीं जानता कि गुजरात 2002 कैसे हुआ और कितने दिन तक चला तब भी उस कांड को कितनी आसानी से भुला दिया जाता है और बिलकिस बानो के अपराधियों को माफी देकर छोड़ दिया जाता है।