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24hnbc विश्व हिंदू परिषद की अभ्यास वर्ग एवं प्रांत बैठक सरस्वती शिशु मंदिर बिलासपुर में
Thursday, 20 Jul 2023 18:00 pm
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बिलासपुर, 21 जुलाई 2023 । दुर्गा वाहिनी पूज्य संत गबरू महाराज जी ने सत्र की शुरुआत सनातन धर्म संत समाज संस्था 
उन्होंने अपने उद्बोधन में जहां की पूर्वजों की अनुकंपा से यह सौभाग्य हमें प्राप्त हुआ है , और पूर्वजों का आशीर्वाद हमें प्राप्त हो , और हम विश्वगुरु बनने के मार्ग में अग्रसर हों। 
 
बसंत जी द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया विश्व हिन्दू परिषद का एक ध्येय है जिसको लेकर हम कार्य कर रहे हैं। गीत के माध्यम से हम समझते हैं 
हमारा निर्माण प्रभु ने क्यों किया है, सारा विश्व का कल्याण करने के लिए हमारा जन्म हुआ है, मनुष्य का भी विकास करने के लिए, भारत को परम वैभव स्थित में पहुंचाने के लिए, हम सब प्रकार के कष्टों को सहन करते हुए हम कार्य कर रहे हैं। 
 
हिंदुओं का जो वैश्विक लक्ष्य है संपूर्ण विश्व को श्रेष्ठ बनाना है। विश्व का कल्याण तभी होगा जब भारत का कल्याण होगा। यह गीत 1909, 30मई को ऋषि अरविंद के भाषण के दौरान उन्होंने यह गीत दोहराया 
 
हिंदू जीवन शैली और मूल्य को देखकर सारा विश्व हमारे सामने नतमस्तक होता है। इसको ही जब हम आधार करेंगे तो भारत के साथ संपूर्ण विश्व का कल्याण होगा। 
मात्रुवर परदारेशु, मतलब अपनी पत्नी छोड़कर समस्त महिला हमारी मातृशक्ति है। जहां पर नारियों का सम्मान होता है वो समाज, परिवार का भला होता है 
 
जब राजा जनक के द्वारा पुत्री जानकी जी का स्वयंवर की घोषणा की तब विस्वामित्र जी राम और लक्ष्मण के लेकर जाने का विचार किया, जब वहां ठहरे और अगले दिन जनक की पुष्प वाटिका में गए , तो बागान के मालिक से प्रभु बात किए और अनुमति मांगी, उसके बाद ही फूल तोड़ा। 
दूसरों की वस्तु मिट्टी का ढेर है , उसके बिना अनुमति के हमें उसके वस्तु को हाथ नहीं लगाना चाहिए। इसको अगर समाज ग्रहण करेगा तो समाज में भ्रष्टाचार नहीं रहेगा, मनमुटाव नहीं रहेगा। 
 
तीसरा सिद्धांत है प्रभु राम के पूर्वज संतानहीन थे, वे अपनी पत्नी के साथ गुरु वशिष्ठ के पास गए, उन्होंने बताया की आपने गौ माता का अपमान किया है इसलिए यह स्थिति हुई, कामधेनु का अभिशाप होने के कारण ऐसा हुआ है। उन्होंने रास्ता बताया की कामधेनु की पुत्री नंदिनी की सेवा करके वरदान प्राप्त करके ही आप संतान प्राप्त कर सकते हो। 
एक दिन जब जंगल में नंदिनी घूम रही थी तोबेक सिंह ने नंदिनी के ऊपर आक्रमण किया , तो महाराज ने सिंह को अनुरोध किया की आप नंदिनी गाय को मत खाइए, आप मुझे भोजन कर लीजिए ऐसा राजा दिलीप ने कहा। 
जैसे हिवसिंह ने आक्रमण किया वैसे ही अंतर्ध्यान हो गए, आकाशवाणी हुई की आप की परीक्षा ली जा रही थी। 
इसका सार यह है की प्रकृति को भी सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है 
 
जो हमको अच्छा नहीं लगता है ऐसा आचरण हम दूसरों के साथ नहीं करेंगे। 
 
साप्ताहिक सत्संग एवं मिलन केंद्र के माध्यम से हम अपनें लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। प्रत्येक कार्यकर्ता, प्रत्येक अधिकारी को मिलन केंद्र सत्संग प्रारंभ करना चाहिए , अपने निवास के केंद्र में यह स्थापित करना चाहिए। 
 
हिंदू जीवन मूल्यों को जब तक अपने अंदर नहीं लायेंगे तो अपने लक्ष्यों की पूर्ति नहीं कर सकते।
पूज्य संत गबरू महाराज , सामरबहार रायगढ़ जिला 
सर्वेश्वर दास, बसंत भाई रथ , केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय सत्संग प्रमुख, मनोज वर्मा , क्षेत्र संगठन मंत्री, जुगराज, क्षेत्र संपर्क प्रमुख, ललित माखीजा , प्रांत उपाध्यक्ष, श्रीमती प्रेम लता बिसेन, जितेंद्र वर्मा विभाग मंत्री राजीव शर्मा , अभिषेक गौतम , प्रमोद कश्यप , विकास शर्मा , दीपक सोनी, संदीप गुप्ता , प्रांत सह कोषाध्यक्ष जितेंद्र चौबे , प्रांत सह प्रचार प्रमुख
मुकेश शर्मा जी , धर्म प्रसार सुनीता जी , क्षेत्र संयोजिका 
कुमारी पूजा जैन प्रांत सह संयोजिका, और अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।