24 HNBC News
24hnbc यूसीसी घर वापसी कार्यक्रम को बीजेपी पहना रही कानूनी कुर्ता संविधान को रख रहे ताक पर
Wednesday, 28 Jun 2023 18:00 pm
24 HNBC News

24 HNBC News

24hnbc.cim
बिलासपुर, 29 जून 2023। देश के परीधान मंत्री ने मध्यप्रदेश भोपाल से यूसीसी के माध्यम से अपना संकट हल करने का दाव खेल ही दिया। इसके पहले यह समझे कि 22 वे विधि आयोग ने 14 जून को कहा 30 दिन के भीतर आम नागरिक और मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठन 30 दिन के भीतर यूनिफॉर्म सिविल कोड समान नागरिक संहिता पर अपने सुझाव दे दें। तमाम नेता जैसा कि परीधान मंत्री चाहते हैं इस मसले को हिंदू बनाम मुसलमान के रूप में पेश कर रहा है जबकि भाजपा आरएसएस का असल एजेंडा घर वापसी अभियान के जाने के बाद पिछले दरवाजे से देश के करोड़ों एसटी को हिंदू बनाना है। जो लोग किसानों का भला करने के लिए तीन कृषि कानून लेकर आ गए थे वही लोग विधि आयोग के द्वारा यूसीसी लेकर आ गए हैं और कह रहे हैं कि समान नागरिक संहिता लागू करना संविधान की भावना के अनुरूप है। पहले यह बताएं कि देश में जब क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम एक नहीं हो पाया तब यूसीसी पर एक नियम सबके लिए कैसे लागू करेंगे। भाजपा की पुरानी आदत है एक ही कुरता सबके लिए। 
छत्तीसगढ़ में एसटी की जनसंख्या 30% है, मध्यप्रदेश में 21%, झारखंड में 26%, मिजोरम में 94.4% , लक्षदीप 94.4%, मेघालय में 86.1%, नागालैंड में 86.5% और इतने बड़े संख्या बल को यह ताकत भारतीय संविधान की पांचवी अनुसूची से मिली है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 342 में 700 जनजाति का उल्लेख है और इन सब की परंपरा मान्यता दैनिक के जीवन शादी विवाह उत्तराधिकार संपत्ति बंटवारा सब को यूसीसी एक कर देगा। आज छत्तीसगढ़ के जोगीसार, चना डोंगरी या कुछ ऐसे क्षेत्र जो राजस्व नक्शे पर गांव नहीं है पर वहां आदिवासी रहते हैं उन्हें तो पता ही नहीं चलेगा कि विधि आयोग में 30 दिन के भीतर यूसीसी पर सुझाव मांगे हैं फिर यूसीसी ने नागरिकों से मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों से सुझाव मांगा ऐसे में वे आदिवासी जोक प्रकृति पूजा करते हैं अपना सुझाव किस माध्यम से दे दे उनका तो कोई मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठन है ही नहींनहीं है। यूसीसी पर परीधान मंत्री का भोपाली भाषण सुनिए शब्दों की उग्रता सुनाई देती है समझ आ जाता है कि यूसीसी की बात शुरू होने के पहले ही नार्थ-ईस्ट वाले लॉ मिनिस्टर को क्यों बदल दिया गया। मामला केवल छत्तीसगढ़ के, मध्य प्रदेश के, महाराष्ट्र के एसटी का नहीं है यह मसला तो हर उस आदिवासी का है जिसे भारत के संविधान ने यह वचन दिया था कि उसकी परंपरा उसकी मान्यता और उसके अधिकार इस जमीन पर, जल में, जंगल में संरक्षित रहेंगे। पर अब इस व्यवस्था ने इसे संकट में डाल दिया है।