24hnbc आखिर अमित जोगी को मिल ही गया नया किनारा
Friday, 16 Jun 2023 18:00 pm
24 HNBC News
24hnbc.com
समाचार -
बिलासपुर, 17 जून 2023। छत्तीसगढ़ की राजनीति में अमित जोगी की बातों की विश्वसनीयता लगातार घटती जा रही है। वर्ष 2023 में ही उन्होंने अपने माता जी के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा था कि इस बार होने वाले विधानसभा चुनाव में वे हिस्सा नहीं लेंगे। मां की सेवा किसी भी चुनाव से बड़ी है, अखबारों ने उनके इस बात को प्रमुखता से छापा सब जानते हैं किसी भी राजनैतिक व्यक्ति के लिए चुनाव सबसे बड़ा इवेंट होता है उसी से दूर रहना उसकी इच्छा नहीं मजबूरी हो सकती है। फरवरी माह में अमित जोगी तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर चंद्रशेखर राव जिन्हें टीआरएस, बीआरएस के साट फॉर्म से जाना जाता है से मिले उनकी यह मुलाकात प्रगति भवन में हुई प्रगति भवन चंद्रशेखर राव की राजनीतिक पार्टी का कैंप कार्यालय है जब दो नेता मिलते हैं तो राजनीति ही उसके मूल में होती है। तो यही बात इस मीटिंग में भी रहे फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई के महीनों में अमित जोगी ने अपनी पार्टी जेसीसीजे जो उनके पिता अजीत जोगी ने बनाई थी के बचे कुचे कार्यकर्ताओं से राय मशवरे में निकाला। केसीआर से उनकी मुलाकात को छत्तीसगढ़ से प्रकाशित होने वाले अखबारों ने कोई विशेष तवज्जो नहीं दिए पर यह खबरें द इंडियन एक्सप्रेस, अमर उजाला में छपी हैं। इस बीच में अमित जोगी ने अपने सोशल मीडिया के अकाउंट से एक 4 पेज की चिट्ठी लिखी जिसमें उन्होंने जेसीसीजे के विलय की संभावना जताई अब लगभग यह फाइनल है कि जेसीसीजे का विलय बीआरएस भारत राष्ट्रीय समिति में हो रहा है और इसके लिए एक बड़े कार्यक्रम की रूपरेखा बन गई है। 2018 के चुनाव में अजीत जोगी की पार्टी ने बीएसपी से गठबंधन किया था जेसीसीजे 57 सीट पर चुनाव लड़ी 5 पर जीती और दो स्थानों पर बीएसपी जीता जेसीसीजे को 7.6% वोट मिला और इस तरह वे मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय राजनीतिक दल बन गए यहां यह जानना भी जरूरी है कि छत्तीसगढ़ में अन्य किसी को ये खिताब हासिल नहीं है। अजीत जोगी ने 23 जून 2016 के दिन जेसीसीजे नाम से राजनीतिक दल बनाया था और 18 के चुनाव में उन्होंने अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई थी। उनके निधन के बाद ही मरवाही विधानसभा का उपचुनाव हुआ और अमित जोगी और उनकी पत्नी रिचा जोगी के नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी द्वारा खारिज कर दिए गए छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरदार है और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हैं जिनका जोगी परिवार से तीखा राजनीतिक विवाद पुराना है। ऐसे में अमित जोगी और उनकी मां जो कोटा से विधानसभा सदस्य हैं चाहे भी तो कांग्रेसमें वापसी नहीं कर सकते । अभी जून माह के प्रथम सप्ताह में बिलासपुर में कांग्रेस पदाधिकारियों का सम्मेलन हुआ और मंच से ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अजीत जोगी का नाम लेते हुए कहा कि जब तक वह कांग्रेस में रहे कांग्रेस की सरकार नहीं बन पाई उन्हें बाहर किया गया तो कांग्रेस की सरकार बन गई। अमित जोगी ने दूसरे ही दिन अपने पिता अजीत जोगी का कांग्रेस में क्या महत्व था और कितनी उपयोगिता थी को रेखांकित करते हुए एक बयान जारी किया था। अमित जोगी और उनकी पार्टी की दुश्वारियां बहुत रही बीच में उनके वरिष्ठ सहयोगी लोनी विधायक धर्मजीत सिंह पार्टी को भाजपा में विलीन करने जा रहे थे और रेणु जोगी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। तभी से अमित जोगी इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिएलिए ठौर ढूंढ रहे हैं बताया जाता है कि वे गैर कांग्रेस, गैर भाजपा वाली राजनीति के चलते आप, टीएमसी, एनसीपी से भी मिले पर बात नहीं बनी इसी दौरान तेलंगाना में कभी कांग्रेस की सहयोगी रही टीआरएस ने स्वयं के विस्तार वाद के लिए अपने को बीआरएस भारत राष्ट्र समिति में तब्दील किया वे चाहते हैं कि पार्टी का विस्तार तेलंगाना से सीमा जोड़ने वाले राज्यों में हो ऐसे में छत्तीसगढ़ उनकी पहली पसंद है। और जेसीसीजे के लिए अन्य कोई विकल्प नहीं है। अमित जोगी, जोगी परिवार छत्तीसगढ़ राज्य में जैसे भी राजनीति करें बिलासपुर उसी से अछूता नहीं रह सकता। जोगी परिवार के लिए बिलासपुर का अर्थ छोटा नहीं है उनकी पहचान बिलासपुर, जांजगीर चांपा, कोरबा, मारवाड़ी, मुंगेली तक जाती है ऐसे में इन जिलों की विधानसभा सीट पर अगला चुनाव निश्चित ही रोचक होगा और वह चुनाव केवल कांग्रेस भाजपा के बीच नहीं रहेगा।