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24hnbc धान की काट छत्तीसगढ़ के असल मुद्दे गायब हैं माथुर की प्राथमिकता से
Wednesday, 14 Jun 2023 18:00 pm
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समाचार -
बिलासपुर, 15 जून 2023। प्रदेश के एक दैनिक अखबार को भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने विशेष साक्षात्कार दिया जिसमें उन्होंने कहा कि धान की काट के लिए घोषणा पत्र का इंतजार कीजिए और प्रदेश में कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और विकास ये चुनावी मुद्दे होंगे। माथुर साहब राजस्थान से आते हैं खाटी आर एस एस वाले हैं इसलिए उन्होंने बड़ी सफाई से भाजपा का संघ का हिडन एजेंडा जो खुला हुआ है पर बात नहीं की, छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण वनवासी बाहुल्य क्षेत्रों के कारण हुआ। 90 सीट वाली इस विधानसभा की 29 सीट एसटी के लिए रिजर्व है, उसके बावजूद माथुर साहब उसे चुनाव का मुद्दा नहीं बताते। 2003 में जावा छत्तीसगढ़ में पहला विधानसभा चुनाव हुआ तब भाजपा के लिए नंद कुमार साय ने पोस्टर बॉय बनना स्वीकार किया। इस समय छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे और उन्हें यह पद एसटी वर्ग का प्रतिनिधि होने के कारण मिला था। ऐसे में भाजपा ने एसटी के विरुद्ध एसटी की नीति अपना ली, इस चुनाव में साय हार गए पर भाजपा को आदिवासी क्षेत्रों में बड़ी सफलता प्राप्त हुई बावजूद इसके भाजपा ने किसी ट्राइबल को प्रदेश का मुखिया नहीं बनाया और यही नीति झारखंड में भी अपनाई, भाजपा ने लगातार 15 साल शासन किया रामविचार नेताम, ननकीराम कंवर, केदार कश्यप को बड़े पद दिए पर छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री कभी किसी आदिवासी को नहीं बनाया। भाजपा की राजनीतिक हाथ के लिए कांग्रेस ने ओबीसी की पॉलिटिक्स की और 2018 के चुनाव में ना केवल मैदानी क्षेत्रों में बल्कि आदिवासी रिजर्व सीटों में भी कांग्रेस ने भाजपा को दगडकर धोया। आज छत्तीसगढ़ के भीतर एक तरफ भाजपा और उसके संगठन धर्मांतरण का आरोप लगाते हैं, लव जिहाद की बांटो वाली नीति रखते हैं ध्रुवीकरण की कोशिश करते हैं पर राज्य की जल, जंगल, जमीन और आदिवासी संस्कृति की रक्षा के लिए एक शब्द नहीं बोलते। कांग्रेस के आदिवासी नेता संत कुमार नेताम ने कहा कि भाजपा के लिए विकास का अर्थ अडानी और अंबानी है शेष तो उनके लिए गुलाम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से लेकर मध्य प्रदेश तक इन दिनों भाजपा कथावाचको की राजनीति कर रही है और दिखावे के लिए आदिवासी नायक का बर्थडे मना देती है। असल में यह वह पार्टी है जो एसटी के पृथक अस्तित्व को स्वीकार नहीं करना चाहते यही इनका मनुवाद है और यही कारण है कि अब जब हिंदी पट्टी का चुनाव नजदीक है तब फिर से सामान नागरिक संहिता का मामला उठाया जा रहा है सुझाव मांगे जा रहे हैं बहुसंख्यक यह सोचता है कि पर्सनल लॉ केवल मुसलमानों का होता है जबकि इससे सर्वाधिक प्रभावित एसटी समुदाय होगा यह वर्ग भारत देश में हर राज्य में पाया जाता है। और वहां का मूल निवास मूल निवासी है।