24 HNBC News
24hnbc राहुल के साथ खड़ा होना क्यों जरूरी है
Thursday, 09 Mar 2023 00:00 am
24 HNBC News

24 HNBC News

24hnbc.com
समाचार -
बिलासपुर, 9 मार्च 2023। वायनाड के सांसद राहुल गांधी इन दिनों यूके में हैं और कैंब्रिज विश्वविद्यालय उसके बाद पत्रकारों के एक संगठन और लेबर पार्टी द्वारा ब्रिटिश पार्लियामेंट में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने उपस्थित लोगों से संवाद स्थापित किया। इसका परिणाम भारत में जिस तरह होना था हो रहा है। तकनीकी युग में जब हम खुद को ग्लोबल विलेज रूप में प्रस्तुत करते हैं तब इस बात का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता कि हमने अपने विचार कहां प्रस्तुत किए तब तो डिजिटल के युग में मिनट में बात कहां से कहां पहुंच जाती है। जिस कार्यक्रम का नाम ही लर्निंग टू लिसन हो उसमें विवाद क्यों करना, आज जो लोग सत्ता में बैठे हैं उनके सुर देखिए कहते हैं राहुल अभी पूर्वोत्तर में हारे हैं उन्हें बोलने का हक नहीं यह कैसा लोकतंत्र है जिसमें हारे हुए को बोलने का हक ही समाप्त हो जाता है। यदि ऐसा ही लोकतंत्र वर्तमान केंद्र पद काबीज पार्टी बनाना चाहती है तो साफ दिखाई देता है कि उनका लक्ष्य सोवियत संघ और चीन के समान शासन प्रणाली है। विदेशी धरा पर क्या बोला जाए क्या बोला का इतिहास उठाकर यदि देखेंगे तो भाजपा के प्रधानमंत्री ने ऐसा बहुत कुछ कहा है जिससे भारत देश के शान में पंख नहीं लगे थे वह जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे उस समय के उनके विदेशी दौरों में भी उन्होंने केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टियों के कामकाज पर बहुत कुछ कहा था। उन्होंने विदेशी धरती पर कहा है एक समय था जब हमें भारत में पैदा होने पर शर्म आती थी। देश पहले पहले स्कैम इंडिया था अब स्किल इंडिया है दो उदाहरणों के अतिरिक्त भी ऐसे कई उदाहरण हैं जब विदेशी धरती पर भाजपा के प्रधानमंत्री ने अपने पूर्ववर्ती निर्वाचित सरकारों को पर्याप्त कोशा है वे यह भूल जाते हैं कि जब वे देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को कोसते हैं तभी वह हमारे आपके माता-पिता, दादा दादी, नाना नानी की भी आलोचना करते हैं जिनके वोट से जीत कर गए। सांसदों में जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री चुना पर जिस जनता ने धर्म की अफीम चार्ट रखी हो उसे सब हरा हरा ही सूझता है जब तक नशा उतर न जाए। फिर पीएम की निंदा देश विरोधी कैसे हो सकती है क्या सत्ता में बैठे किसी व्यक्ति की निंदा करना देश की निंदा करना है। राहुल गांधी ने अपने कैंब्रिज भाषण में पेगासस पर जो कहा उसमें क्या गलत है सुप्रीम कोर्ट ने उस प्रकरण में यह लिखा है कि सरकार द्वारा पेगासस जांच में सहयोग नहीं किया गया संसद की जिस प्रणाली में राहुल गांधी सहित कई नेताओं के भाषण सेंसर कर दिया जाए उस स्थिति में भी किया जाए जब कोई भी शब्द असंसदीय ना हो तो इसे गैर लोकतांत्रिक ही तो कहा जाएगा। न्यायपालिका में जब एक साथ कई जज पत्रकार वार्ता करें और सिस्टम पर प्रश्न उठाए तो दबाव ही तो माना जाएगा यदि जनप्रतिनिधि को यह लग रहा है कि देश के बेसिक स्ट्रक्चर को दबाया जा रहा है तब इस बात को बोलने में गलत क्या हो गया। राहुल गांधी ने कहा भारत फेडरल स्ट्रक्चर वाला है और अभी राज्यों के साथ केंद्र का विमर्श सचिन हो चला है। केंद्र मनमर्जी निर्णय लेता है उदाहरण कृषि के तीन अध्यादेश हैं जिसमें एक अध्यादेश तो राज्य अनुसूची का विषय था और केंद्र ने अपनी सीमा लाघते हुए उस पर अपना कानून बनाया था। ब्रिटेन में या किसी अन्य देश की धरती पर जाकर अपनी बात रखना हमारे देश की परंपरा है और इस परंपरा में गांधी, विवेकानंद, सावरकर, रजनीश, जय प्रकाश, अटल बिहारी जैसे सैकड़ों नाम है ऐसे में एक नाम यदि राहुल गांधी का भी जुड़ गया तो भाजपा के प्रधानमंत्री और उनके भक्तों को इतना मरोड़ क्यों हो रहा है। आज जब देश के निर्वाचन आयोग में नियुक्ति को लेकर भी उच्चतम न्यायालय ने विस्तृत व्यवस्था भी ईडी सहित केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर उच्चतम न्यायालय प्रकरण सुन रहा है तो पूरे लोकतांत्रिक देशों को यह सब पता चले कि इस बात में शर्म कैसी. .....।