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24hnbc शहर की राजनीति में भाजपा चल सकती है ओबीसी कार्ड
Friday, 17 Feb 2023 18:00 pm
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समाचार -
बिलासपुर, 18 फरवरी 2023। 2 दशक से अधिक समय के बाद भारतीय जनता पार्टी के सामने बिलासपुर विधानसभा से प्रत्याशी कौन हो ढूंढने की समस्या है छत्तीसगढ़ में 15 वर्ष तक राज करने वाली भाजपा इस संकट के सामने परेशान भी है। उसके सामने चुनौती है वह स्थापित मारवाड़ी लाइन पर चले या पूरे प्रदेश में उसने ओबीसी नीति का जो मंत्र पकड़ा है उस पर चले। इन दोनों के बीच एक ब्राह्मण लाइन भी है जिस पर चलने की हिम्मत भाजपा में नहीं है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय के बिलासपुर विधायक बी आर यादव को चुनौती देने के लिए भाजपा ने मूलचंद खंडेलवाल पर भरोसा जताया था। एक बार वह जीते और एक बार वो हारे कर उनकी विदाई हुई। 1996 की चुनाव में मूलचंद खंडेलवाल का टिकट काटकर अमर अग्रवाल को टिकट देना सहज था। एक मारवाड़ी का टिकट कांटा दूसरे को मिल गया समाज में कोई नाराजगी नहीं हुई वैसे भी राजनीति में उन्हें वोट बैंक की दृष्टि से नहीं देखा जाता इनकी नाराजगी तो तिजोरी से जुड़ी है। 1996 की चुनाव के बाद अमर अग्रवाल लगातार जीते रहे इसी कारण प्रत्याशी बदल बदल कर चुनाव जीतने की चुनौती कांग्रेस के सामने थी कभी अनिल टाह कभी वाणी राव, अमर अग्रवाल ने अपना प्रत्येक चुनाव 5000 प्लस से ही जीता कुछ जानकारों को तो यह भ्रम होने लगा था कि उनके पास लगभग 3000 मतदाता उनके जेबी मतदाता हैं इस दौरान यह भी ध्यान देने योग्य बात है की नगर निगम में महापौर का चुनाव मतदाता द्वारा सीधे किया गया और भाजपा के पास जीते हुए महापौर हैं और वे दोनों जीते हुए महापौर ओबीसी वर्ग से आते हैं महापौर का वह चुनाव जो भाजपा ने जीता जिसे सीधे महापौर का अंतिम चुनाव भी कहा जा सकता है ने सिद्ध किया कि किशोर राय के पास व्यक्तिगत रूप से बहुत बड़ा वोट बैंक है। उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी को अमर अग्रवाल के मुकाबले ज्यादा वोटों से हराया था और वह अंतर 10,000 से अधिक का था ऐसे में यदि भाजपा के प्रत्याशी चयन समिति अपनी ओबीसी पॉलिटिक्स पर चली तो बिलासपुर से प्रत्याशी ओबीसी वर्ग से होगा। इतना ही नहीं आर एस एस के चीफ ने तो हालिया बयान दिया है जिसमें ब्राह्मणों को जातिवाद का रचयिता बता दिया सीधा संकेत है ब्राह्मण ठाकुर भाजपा को वोट ना करें क्योंकि भाजपा ओबीसी की पॉलिटिक्स कर रही है बिलासपुर में दो सवर्ण डॉक्टर टिकट का दावा करते हैं पर अंदरूनी हालात बताते हैं कि टिकट नहीं मिलेगा। पड़ोसी मध्यप्रदेश में डॉक्टर को भाजपा ने टिकट देकर देखा सरकार होते हुए वह 50000 वोट से हारा राजनीति में इसे इज्जत लुट जाना कहते हैं धोबी पछाड़ कहते हैं सबक सीख लिया गया है डॉक्टर वो भी सवर्ण करेला और नीम एक साथ नहीं खाया जाएगा भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी खोजो पर कांग्रेसियों की भी रुचि है। कहा जाता है कि बिलासपुर कांग्रेस में सेठ भाजपा को पसंद करने वाले फूल छाप कांग्रेसी बहुत हैं जिन्हें आज भी विश्वास है कि बिलासपुर विधानसभा का टिकट उन्हें ही मिलेगा।