2023 के चुनाव में एससी बनेगा गेम चेंजर ओबीसी को छोड़ भाजपा निकली एससी साधने
Wednesday, 21 Dec 2022 18:00 pm
24 HNBC News
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बिलासपुर, 22 दिसंबर 2022। छत्तीसगढ़ में जैसे-जैसे चुनाव पास आ रहा है राजनीतिक दलों ने वोटर को साधना प्रारंभ कर दिया है। प्रारंभ में छत्तीसगढ़ में एसटी वोटर के सहारे सरकार बनाई जाती थी। 2003 में कांग्रेस की ओर से अजीत जोगी एसटी चेहरा थे तो भारतीय जनता पार्टी में नंदकुमार साय को उनके सामने रखा था। विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने अपना रंग बदला और एसटी के स्थान पर सामान्य वर्ग से डॉक्टर रमन को मुख्यमंत्री बना दिया अनुशासन के दायरे में रहने वाले नेता अन्य मंत्री पद पाकर चुप हो गए यह लिस्ट रामविचार नेताम, ननकीराम, केदार कश्यप तक है। 10 साल शासन करने के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदली और एसपी को छोड़ ओबीसी मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित किया भाजपा की देखा सीखी कांग्रेस ने भी ओबीसी चेहरों को आगे बढ़ाया परिणाम साहू, कुर्मी, यादव सहित दर्जनों जातियों का ओबीसी वर्ग राजनीति में तेजी से आगे बढ़ा बस यहीं पर भाजपा गच्चा खा गई ओबीसी वर्ग राजनीतिक रूप से ज्यादा सतर्क है वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलता लिहाजा कांग्रेस ने भाजपा को पटखनी दे दी कांग्रेस ने अपना वादा निभाया ओबीसी वर्ग से ही मुख्यमंत्री बनाया अभी हाल ही में संशोधित आरक्षण बिल ने फिर से छत्तीसगढ़ की राजनीति का परिदृश्य बदला है एक तरफ राजनैतिक दल ओबीसी चेहरों को दिखाकर ओबीसी मतदाताओं को खुश करना चाहते हैं इसका परिणाम है कि भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष इसी वर्ग से आते हैं जबकि कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग से सीएम चुन रखा है आरक्षण बिल पास होने के बाद पूरे राज्य में एससी मतदाताओं के बीच नाराजगी देखी जा रही है और भारतीय जनता पार्टी इसी नाराजगी को अपने पक्ष में करना चाहती है तब ही तो भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री बिलासपुर की मस्तूरी विधानसभा से इस वर्ग को साधने निकल पड़े हैं जिले में एससी जनसंख्या 2011 के मुताबिक 369000 को क्रास करती है । 2023 के मतदाता सूची में इस वर्ग के अनुमानित वोटरों की संख्या इससे ज्यादा हो चुकी है ऐसे में एसी सीट से मतदाता प्रबंधन, कार्यकर्ता प्रबंधन जरूरी हो गया है। इसी सिलसिले में कांग्रेस ने जब परंपरागत बोरे बासी का खेल खेला तो अब भाजपा अपने आम कार्यकर्ता के घर पर मोटा चावल खाने निकल पड़ी है। एक तरफ डिजिटल इकोनामी, डिमॉनेटाइजेशन, विदेशी निवेश जैसे भारी-भरकम शब्द दूसरी तरफ आम मतदाताओं को लुभाने के लिए मोटा चावल क्या प्रभाव डालेगा यह देखने लायक रहेगा.... ।