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24hnbc कांग्रेस-भाजपा दोनों से चुनाव लड़ चुके हैं जय नारायण त्रिपाठी
Friday, 16 Dec 2022 18:00 pm
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समाचार -
बिलासपुर, 17 दिसंबर 2022। आज हम आपको जय नारायण त्रिपाठी कि उस कहानी से परिचित कराते हैं जो भाजपा और कांग्रेस दोनों को मुंह छुपाने पर मजबूर करती है। बिलासपुर नगर पालिक निगम का वह चुनाव जिसमें शहर के बड़े कांग्रेसी नेता स्वर्गीय अशोक राव महापौर बने में जय नारायण त्रिपाठी जो आज के बहुचर्चित चेहरे, प्राण नाथ त्रिपाठी उर्फ संजू और कपिल त्रिपाठी उर्फ़ ईशान के पिता हैं को वार्ड नंबर 1 से जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ने का मौका मिला, वे चुनाव जीतकर स्थानीय निकाय की निर्वाचन प्रणाली के अंग भी बने बाद में जब आपातकाल लगा तो भाजपा का एक गुट कस्तूरी सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस प्रवेश कर गया तब उस ग्रुप में जय नारायण त्रिपाठी भी शामिल थे और अविभाजित मध्यप्रदेश के समय जब राजेश पांडे नगर पालिक निगम बिलासपुर के महापौर बने तो उस चुनाव में बाजार वार्ड से जय नारायण त्रिपाठी कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार थे, और राजेश पांडे ने दो पत्ती पर निर्दलीय चुनाव लड़कर चुनाव जीता और जय नारायण त्रिपाठी को तीसरे नंबर पर ढकेल दिया। यह एक ऐसा चुनाव था जिसने बिलासपुर शहर में कांग्रेस के गुटिय संतुलन को बिगाड़ कर रख दिया राजेश पांडे उस समय के युवा तुर्क माने जाते थे और युवा कांग्रेस के पदाधिकारी भी थे। बाजार वार्ड से चुनाव लड़ने की इच्छा रखते थे पर कांग्रेस के बड़े नेताओं के चक्कर में उन्हें टिकट नहीं मिली कथित बड़े नेताओं ने जय नारायण त्रिपाठी पर कृपा बरसाए और पंजे पर उन्हें चुनाव लगवाया। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने बाजार वार्ड से जिसे टिकट दिया उसकी भी सामाजिक छवि वैसी ही थी जैसी कांग्रेस प्रत्याशी की लिहाजा स्थानीय नागरिकों ने राजेश पांडे को ना केवल चुनाव लड़ने के लिए उत्साहित किया बल्कि उसे जीता भी दिया और गूटीय राजनीति के कारण निर्दलीय रूप में दो पत्ति से चुनाव जीते राजेश पांडे महापौर भी बने अब भले ही प्रशासन त्रिपाठी परिवार को राजनीति से दूर बताएं पर सच्चाई यह है कि त्रिपाठी परिवार भाजपा और कांग्रेस दोनों से राजनीति करता रहा है। 
प्राण नाथ त्रिपाठी की हत्या के बाद से उसका भाई कपिल त्रिपाठी लगातार फरार है और इस दौरान पुलिस को जो जो गाड़ियां मिल रही है उनमें से एक गाड़ी डिस्कंटीन्यू मॉडल की बलेनो केवल षड्यंत्र को भटकाने के लिए प्लांट की नजर आती है। आज कौन व्यक्ति है जो मारुति की डिस्कंटीन्यू बलेनो पर सवार होकर घूमता हो. .... शातिर अपराधी जिनका क्रिमिनल रिकॉर्ड बिलासपुर के कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की नौकरी से ज्यादा अनुभव रखता है वे अच्छे से जानते हैं कि हत्या के अपराध में आरोपी की संख्या जितनी ज्यादा होगी कोर्ट से सजा की गुंजाइश उतनी कम होगी। इसका सबसे बड़ा उदाहरण जग्गी हत्याकांड है। सत्र न्यायालय से सजा प्राप्त आरोपियों की संख्या उसके बाद हाई कोर्ट से छूटे आरोपियों की संख्या और अंत में उच्चतम न्यायालय का आदेश इसलिए बिलासपुर पुलिस के आला अधिकारियों के सामने जितनी बड़ी चुनौती प्राण नाथ त्रिपाठी के हत्यारों को पकड़ना है उससे बड़ी चुनौती यह रहेगी कि एक ऐसा सबूतों के आधार पर पेश किया गया प्रकरण जिस पर कोई भी आरोपी सबूत के अभाव में न्यायालय से बरी ना हो पाए ।