24hnbc छत्तीसगढ़ में शैलजा के लिए सब कुछ मीठा मीठा नहीं है
Tuesday, 06 Dec 2022 18:00 pm
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बिलासपुर, 7 दिसंबर 2022। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लगभग 300 दिन पूर्व कांग्रेस ने अपना प्रभारी बदला है और कुमारी शैलजा की नियुक्ति हुई है। पुराने प्रभारी पीएल पुनिया को जो काम सौंपा गया था वह उन्होंने बखूबी निभाया। कहते हैं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की पुणे से अच्छी पटरी बैठी थी और जब कभी भी भूपेश बघेल पर राजनीतिक संकट आया पूनिया ने उन्हें पूरा समर्थन दिया क्या ऐसा समर्थन अब कुमारी शैलजा से भी मिलेगा तो इस पर कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता। पुनिया के मुकाबले शैलजा ज्यादा घूमती हुई नेता है पुनिया आईएएस की नौकरी छोड़कर नेतागिरी में आए जबकि शैलजा पारंपरिक रूप से राजनीतिक परिवार में पैदा हुई उनके पिता भी कांग्रेस की राजनीति करते थे और वह स्वयं प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के मंत्रिमंडल में भी राज्य मंत्री रह चुकी हैं उस समय उनके मंत्री अर्जुन सिंह हुआ करते थे बाद में पंद्रहवीं लोकसभा में वे आवास, शहरी गरीबी उन्मूलन पर्यटन मंत्रालय में मंत्री बनी इस बार भी कोशिश हो रही थी कि उन्हें राज्यसभा की टिकट दे दी जाए पर नहीं हो पाया। वह हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष भी रही हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के समक्ष वैसी परेशानी नहीं है कि दल बदल से सरकार बदल जाए यहां की परेशानी कुछ अलग किस्म की है। 300 दिन बाद चुनाव होने हैं सत्ता का स्वाद चखने के साथ-साथ कांग्रेस परभ्रष्टाचार के आरोप गांव से राजधानी तक है। प्रदेश में संगठनात्मक चुनाव हो जाने के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्तियां अटकी पड़ी है और अभी तक प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम को भी दुबारा कमान मिल जाएगी इस बात का इंतजार है यदि प्रदेश अध्यक्ष बदला जाना है तो जल्द से जल्द ऐसा हो जाना चाहिए अन्यथा अब चुनाव को देखते हुए देर हो जाएगी। संगठन और विधायक को लेकर कुछ जिलों में खींचातानी भी है इसका पहला उदाहरण बिलासपुर है। जहां पर संगठन के कुछ नेता हमेशा इस प्रयास में रहते हैं कि निर्वाचित विधायक की टांग कैसे खींची जाए। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री से आशीर्वाद प्राप्त कुछ मंत्री और विधायक प्रदेश के लोकप्रिय स्वास्थ्य मंत्री की प्रतिष्ठा को धक्का देने का कोई अवसर नहीं छोड़ते कांग्रेश की जीती हुई सीट निश्चित तौर पर कम होंगी ऐसे में उनकी भरपाई जहां से होनी है वहां पर कांग्रेस की कोई विशेष तैयारी नहीं है केवल ओबीसी ओबीसी पूछने से एससी सीट नहीं निकलने वाली वैसे भी 76% आरक्षण में एससी आरक्षण में 16 से कटौती बाद इन सीट पर जीतने का कोई मजबूत फार्मूला सूचना होगा और इसके लिए संगठन के पास बूथ स्तर पर प्रबंधन की क्षमता होना चाहिए जबकि यह क्षमता बढ़ने के स्थान पर घट गई है छत्तीसगढ़ का फार्मूला जिसे बड़े उम्मीद के साथ असम में लगाया गया परिणाम विपरीत रहा। उत्तर प्रदेश में लगाया गया परिणाम शून्य हो गया ऐसे में छत्तीसगढ़ को केवल परंपरा का भरोसा मानकर ढीला नहीं छोड़ा जा सकता है सो शैलजा की प्रतिभा की परीक्षा तो होनी ही है।