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24hnbc आज का पंचांग, 4 दिसंबर 2022
Saturday, 03 Dec 2022 18:00 pm
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समाचार -
राहुकाल दोपहर 04 बजकर 30 मिनट से 06 बजे तक। दोपहर 12 बजे से 01 बजकर 30 मिनट तक यमगंड रहेगा। दोपहर 03 बजकर 30 मिनट से 04 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल रहेगा। दुर्मुहूर्त काल शाम 04 बजकर 01 मिनट से 04 बजकर 42 मिनट तक रहेगा।
राष्ट्रीय मिति मार्गशीर्ष 13, शक संवत 1944, मार्गशीर्ष, शुक्ल, द्वादशी, रविवार, विक्रम संवत 2079। सौर मार्गशीर्ष मास प्रविष्टे 19, जमादि-उल्लावल-09, हिजरी 1444 (मुस्लिम), तदनुसार अंग्रेजी तारीख 04 दिसम्बर सन् 2022 ई०। सूर्य दक्षिणायन दक्षिण गोल, हेमंत ऋतु।
आज का अशुभ मुहूर्त 4 दिसंबर 2022 :
राहुकाल दोपहर 04 बजकर 30 मिनट से 06 बजे तक। दोपहर 12 बजे से 01 बजकर 30 मिनट तक यमगंड रहेगा। दोपहर 03 बजकर 30 मिनट से 04 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल रहेगा। दुर्मुहूर्त काल शाम 04 बजकर 01 मिनट से 04 बजकर 42 मिनट तक रहेगा।राहुकाल सायं 04 बजकर 30 मिनट से 06 बजे तक। द्वादशी तिथि अगले दिन सुबह 05 बजकर 58 मिनट तक उपरांत त्रयोदशी तिथि का आरंभ। अश्विनी नक्षत्र अगले दिन प्रातः 07 बजकर 15 मिनट तक उपरांत भरणी नक्षत्र का आरंभ।
वरीयान योग अर्धरात्रोत्तर 03 बजकर 40 मिनट तक उपरांत परिधि योग का आरंभ। बव करण सायं 05 बजकर 47 मिनट तक उपरांत कौलव करण का आरंभ। चंद्रमा दिन रात मेष राशि पर संचार करेगा।
आज का व्रत त्योहार - मोक्षदा एकादशी व्रत 2022, अखण्ड द्वादशी।
सूर्योदय का समय 4 दिसंबर 2022 : सुबह 06 बजकर 58 मिनट पर।
सूर्यास्त का समय 4 दिसंबर 2022 : शाम 05 बजकर 23 मिनट पर।
आज का शुभ मुहूर्त 4 दिसंबर 2022 :
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक। विजय मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 55 मिनट से 02 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। निशिथ काल मध्‍यरात्रि 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक। गोधूलि बेला शाम 05 बजकर 21 मिनट से 05 बजकर 49 मिनट तक। अमृत काल मध्‍यरात्रि 11 बजकर 45 मिनट से 01 बजकर 25 मिनट तक। सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन रहेगा।
आज का अशुभ मुहूर्त 4 दिसंबर 2022 :
राहुकाल दोपहर 04 बजकर 30 मिनट से 06 बजे तक। दोपहर 12 बजे से 01 बजकर 30 मिनट तक यमगंड रहेगा। दोपहर 03 बजकर 30 मिनट से 04 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल रहेगा। दुर्मुहूर्त काल शाम 04 बजकर 01 मिनट से 04 बजकर 42 मिनट तक रहेगा।
आज का उपाय : तांबे के लोटे में जल में काले तिल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। (आचार्य कृष्णदत्त शर्मा)