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संविधान बचाओ राष्ट्र बचाओ यह है छत्तीसगढ़ की "के" कंपनी, सिस्टम के हर खंभे से बनाए जाते हैं निदेशक
Friday, 18 Nov 2022 18:00 pm
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समाचार -
बिलासपुर, 19 नवंबर 2022। इस कहानी में पात्रों के नाम और पद महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि छत्तीसगढ़ को राज्य बने मात्र 22 साल हुए हैं, और पूरा सिस्टम करप्ट हो गया। मुंबई में जो कारनामे लोकतंत्र के चारों पायदान के बारे में होते होते 60 साल लगा वह हमारे घर मात्र 20 साल में हो गया जिनकी राहबरी में यह सब हुआ उन्हें वक्त मिले तो अपने अपने गिरेबान में झांक लेना चाहिए। किसी भी राज्य का पूरा सिस्टम खराब हो या नहीं कैसा है यह जांचने के लिए केवल 2 जिले नमूने के रूप में उठाकर देखने पड़ते हैं। पहला जहां राजधानी हो और दूसरा जहां न्याय का सबसे बड़ा परिसर हो। 
बिलासपुर जिले में अभी से नहीं राज्य बनने के 2 साल बाद ही एक के कंपनी की नापाक आधारशिला रख ली गई। इस कंपनी में जिन्हें हम लोकतंत्र के खंभे कहते हैं। उनमें से के मठाधीश बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल हो गए। समय-समय पर कभी उन्होंने कोयले का काम किया, जमीनों का काम किया, बहुमूल्य खनिज संपदा का काम किया, बांध के काम में रुचि ली तो कभी रेल काडिडोर बनवाये । हत्या भी हुई, व्यभिचार भी हुआ कभी-कभी तो कमाई देखकर इसके कंपनी ने शिक्षा के पवित्र पेशे को भी गंदा कर डाला। 
बिलासपुर में जब कभी भी किसी भी नाम से संगठित अपराध को नियंत्रित करने के लिए कोई यूनिट बनी तभी कुछ ही दिनों के भीतर सेप्टिक टैंक का ढक्कन बजबजाती गंदगी के दबाव से खुल गया बिलासपुर में पिछले दो-तीन दिनों से जो कुछ एसीसीयू के बारे में लिखा पढ़ा जा रहा है उसका सार यही है कि इन चर्चित चेहरों को एक बार उनके कृतियों के कारण नौकरी से हाथ धोना पड़ा पर जब चारों खंभों में के कंपनी के निदेशक बैठे हो तो बहाली हो ही जाती है शो हो गई और एक नई पारी खेलने यह करप्ट सिस्टम मैदान में उतर गया। जो लोग नाम ले लेकर लिख रहे हैं उनमें से कुछ इसी के कंपनी के मुलाजिम रहे है। फिर से बन सकते हैं व्यवस्था ने जो शामिल नहीं है वह तब तक क्रांतिकारी है जब तक अंदर जाने की जगह नहीं मिल रही वह सभी ज्ञानी युवा से लेकर पुराने तक याद रखें जिस स्थान पर न्याय मांगने गए थे उसने आपसे आप ही की चॉइस क्यों पूछी कारण स्पष्ट है । जांच कोई करें परिणाम तो एक ही आता है के कंपनी का बोर्ड ऑफ डायरेक्टर बदलता रहता है पर कंपनी सदा जीवित रहती है। कॉमर्स के स्टूडेंट इस सत्य को जानते हैं।