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24hnbc उप चुनाव नहीं लड़ेंगे, परिवारिक दोस्ती निभा भी दी और जोगी जन अधिकार यात्रा का प्रचार भी शुरू कर दिया
Tuesday, 15 Nov 2022 18:00 pm
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समाचार :-
बिलासपुर, 16 नवंबर 2022। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के नेता अमित जोगी ने भानूप्रतापपुर बाय इलेक्शन में मनोज मंडावी को अपना अपने परिवार का बेहद करीबी बताते हुए उपचुनाव में कोई प्रत्याशी न खड़ा करने का एलान को राजनीतिक चतुर्थ वाला निर्णय कहा जा सकता है....... । 2 दिन पूर्व रविवार तारीख 13 नवंबर बिलासपुर आवास पर उन्होंने पत्रकार वार्ता में 26 नवंबर से जोगी जन अधिकार यात्रा की घोषणा की थी। तभी यह स्पष्ट संकेत मिल गया था कि उपचुनाव में उनकी या उनके पार्टी कि कोई राजनीतिक रुचि नहीं है। जेसीसीजे से लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह की विदाई के बाद जेसीसीजे के भाजपा की ओर झुकने की संभावना पूर्व की अपेक्षा कम हो गई इसके पहले राष्ट्रपति चुनाव में जेसीसीजे ने अपने सभी वोट भाजपा प्रत्याशी को दिए थे। 
तब भी अमित जोगी ने भाजपा की राष्ट्रपति प्रत्याशी को जोगी परिवार का पुराना मित्र बताया था, इन दोनों निर्णयों से एक संकेत ऐसा लगता है कि जेसीसीजे के निर्णय राजनीतिक कम पारिवारिक रिश्तो पर ज्यादा होते हैं। असल में छत्तीसगढ़ के पहले विधानसभा चुनाव में जेसीसीजे ने जिस तरह से सीट जीती थी उन की मारक क्षमता तब समाप्त हो गई जब पूर्व मुख्यमंत्री जेसीसीजे के संस्थापक अजीत जोगी का देहांत हुआ जोगी परिवार के राजनीति को समाप्त करने का घोषित अघोषित निर्णय छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मुख्यमंत्री ने ले रखा है। 
मरवाही का बाय इलेक्शन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है किस तरह अमित जोगी की जाति प्रमाण पत्र रद्द हुआ उनकी पत्नी रिचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र, नामांकन रद्द हुआ अमित जोगी को बाय इलेक्शन के पहले जेल यात्रा करनी पड़ी सब का एक ही इशारा दिखाई दिया कि छत्तीसगढ़ छोड़ें बिलासपुर जिला यहां तक की मरवाही की राजनीति से भी जोगी परिवार को हाशिए पर धकेल दिया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की एक तरफा नीति के चलते प्रदेश कांग्रेस के किसी नेता की क्या कहें. ...। 
स्वर्गीय अजीत जोगी के दिल्ली मित्रों से भी कोई मदद कभी दिखाई तो नहीं दी जबकि राजनीति के कुछ जानकार भी यह जानते हैं कि अपने लंबे राजनीतिक सफर में श्री जोगी ने दिल्ली से लेकर कई राज्यों में अपने हित चिंतकों की बड़ी सूची बना डाली थी। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है छत्तीसगढ़ में राजनीति के समीकरण बनते बिगड़ते नजर आएंगे। 
छत्तीसगढ़ में अब तक जितने चुनाव हुए एक तीसरे राजनीतिक दल ने प्रभाव दिखाया है। पहली बार सत्ता से कांग्रेस की विदाई का बड़ा कारण एनसीपी और उसके बाद वोट कटवा बीएसपी कांग्रेस को सत्ता से दूर किया। 2018 के चुनाव में जेसीसीजे ने वोट प्रतिशत और विधायक संख्या को महत्वपूर्ण बना दिया यदि टक्कर कांटे की होती तो जेसीसीजे के पास सत्ता की चाबी होती हाल ही में बिलासपुर में हुंकार रैली ने यह बता दिया कि भाजपा विपक्ष के रूप में धारदार भूमिका अदा नहीं कर पा रही । उसे आयातित नेता की जरूरत आन पड़ी यह स्थिति 2001- 2003 के समय नहीं थी। प्रदेश भाजपा के पास बूढ़े, थके हुए, घिसेपीटे चेहरों के अतिरिक्त कोई है भी नहीं । 
26 तारीख से जब अमित जोगी अपनी जोगी जन अधिकार यात्रा शुरू करेंगे तब दोनों बड़े राजनीतिक दल को यह दिखाना होगा कि जनवादी मुद्दे पर सड़क पर जनता उन्हें इस रूप में लेती है। प्रदेश कांग्रेस के पास एक मौका था कि वह अपने नेता राहुल गांधी से प्रेरणा लेते और पदयात्रा करते जिस तरीके की दिखावटी पदयात्रा छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी नेता कर रहे हैं उसे मॉर्निंग वॉक और शाम को खाना खाने के बाद टहलना कहा जाता है। तो 26 तारीख से बिलासपुर संभाग या कहीं की अविभाजित बिलासपुर की राजनीति में नेताओं को अपने गिरेबान में झांकना शुरू कर देना चाहिए। और यह काम कांग्रेस - भाजपा दोनों के नेताओं को करना होगा. ..।