24hnbc राज्य का पता नहीं जिले में विधायिका और कार्यपालिका का संतुलन फेल
Friday, 04 Nov 2022 18:00 pm
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समाचार :-
बिलासपुर 5 नवंबर 2022 । लोकतंत्र की सफलता कार्यपालिका और विधायिका के सामंजस पर निर्भर करती है और यह सामंजस राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक होता है, विशेषकर बिलासपुर में यह सामंजस 2003 के बाद कभी बना ही नहीं पढ़ने वालों को अचरज लग सकता है कि जिला स्तर पर भी कार्यपालिका और विधायिका के बीच सामंजस कैसे हो सकता है पर ऐसा है। पहले नई सरकार की बात करें कलेक्ट्रेट स्थित मंथन सभा कक्ष में गांधीजी के पीठ के पीछे कांग्रेस सरकार के गृह मंत्री पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर और बिलासपुर के प्रभारी मंत्री ताम्रध्वज साहू द्वारा जो पहली समीक्षा बैठक हुई वह दो पाली में थी। पहले पीडब्ल्यूडी उसके बाद पुलिस. .....
मंत्री महोदय ने बड़े कड़े तेवर दिखाए थे कहा इस बार तो विधानसभा में बक्श दिया पर अब ऐसा नहीं होगा। शिकायत मिलने पर निलंबन की घोषणा विधानसभा में ही कर दी जाएगी अधिकारियों को लगा बढ़िया मंत्री है पर जो लोग मंत्री महोदय का इतिहास जानते थे, उन्हें पता था कि कितने कड़क हैं नारियल जैसे हैं पपीते जैसे हैं या उससे भी गुलगुले हैं । परिणाम सब ने देखा बताते हैं रमन सिंह की विदाई के बाद जब नए मुख्यमंत्री की चयन प्रक्रिया चल रही थी तब दुर्ग में यह कहते हुए पटाखे फूटे थे कि ताम्रध्वज साहू छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री घोषित कर दिए गए यदि ऐसा हो जाता तो कल्पना करें कि छत्तीसगढ़ में और कितना लचर प्रशासन होता। जिस मंत्री से अपने दो विभाग होम और पीडब्ल्यूडी नहीं संभाल रहे हैं वह पूरा छत्तीसगढ़ क्या संभाल लेते. .... यदि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हारी तो उसके पीछे इन्हीं का हाथ होगा वैसे मुख्यमंत्री की फ्लैगशिप योजनाओं से जनता नाराज नहीं है जो नाराजगी है वह दो मुख्य हैं। लॉयन ऑर्डर और पीडब्ल्यूडी की रोड।
अभी हाल ही में बेल और जेल के कुछ ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें स्पष्ट पता चलता है कि शातिर आदतन अपराधी तो 1 दिन या उसी दिन जमानत पा जाते हैं और नए नौ सीखिए 2-2 हफ्ते से जेल में हैं, और धारा मात्र 384, अब दिए गए उदाहरण को स्पष्ट करते हैं बिलासपुर का दुर्गा विसर्जन समारोह आरोपी कई दिन फरार रहा पुलिस पकड़ कर लाए जनता को प्रभाव दिखाने के लिए आरोपी का जुलूस निकाला गया आरोपी को 3 दिन में जमानत मिल गई। बताते हैं 1 दिन ही जेल में रहा और दूसरा उदाहरण अपहरण मारपीट के आरोपी को बड़ी तैयारियों के साथ पकड़ा गया आरोपी के ऑफिस में शराब भी बरामद की गई पुलिस ने पत्रकार वार्ता कर अपनी सफलता का बखान भी किया आरोपी को उसी दिन में जमानत मिल गई। थाने से कोर्ट तक जुलूस भी निकला था। तीसरा उदाहरण बैंकिंग फ्रॉड का एक करोड़ से ज्यादा का बैंकिंग फ्रॉड हुआ है पुलिस ने फ्रॉड करने वालों को पकड़ा आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत मिल गई 60 दिन निश्चित नियाद के भीतर पुलिस चालान प्रस्तुत नहीं कर सकी। अब उदाहरण ऐसे आरोपी का जो ना अपहरण किया ना जिसके पास हथियार बरामद हुए ना ही जिसने पूर्व में कभी अपराध किए हैं जिसका कोई अपराधिक इतिहास नहीं रहा मामला राजधानी के राखी थाने का है 4 पत्रकार जो तहसीलदार के पास विज्ञापन मांगने गए थे और तहसीलदार ने ट्रैप करते हुए 384, 34 का एफआईआर करा दिया। साथ में जमानत का विरोध करने कोर्ट में खड़े हो गए कहे इनसे मुझे जान को खतरा है कोर्ट ने दो बार जमानत अर्जी खारिज कर दी 4 पत्रकार बेचारे तब से अब तक जेल के अंदर हैं और आदतन अपराधी सड़क पर डंडे चलाने वाले हत्या कर देने वाले आत्महत्या के लिए बाध्य करने वाले आरोपियों को तत्काल जमानत मिल जाती है इसे कार्यपालिका और विधायिका के बीच टूटते सामंजस के रूप में ही देखा जा सकता है।
ताम्रध्वज साहू के बाद वर्तमान में बिलासपुर के प्रभारी मंत्री राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल हैं। पद पाने के बाद हम ही ने मंत्री के प्रथम प्रवास पर लिखा था समस्या का अंत या प्रारंभ बिलासपुर के प्रभारी मंत्री बने श्री अग्रवाल, ..... अब समझे भोंदू दास जमीन घोटाले का मास्टरमाइंड लगातार अभी भी शासकीय जमीनों को चर रहा है पर साहू जी की पुलिस ऐसे मामलो में जमीन क्रेता को इनोसेंट बताती है। बिलासपुर में सत्ता पक्ष के दो विधायक हैं, जिनमें से एक संसदीय सचिव है अन्य विधानसभा से विपक्षी दल के विधायक हैं। ऐसा लगता है कि प्रभारी मंत्री या किसी भी अन्य विभाग के मंत्री जब कभी बिलासपुर आते हैं तो वह स्थानीय प्रशासन पर प्रभाव दिखा ही नहीं पाते तभी तो बेचारा नगर निगम, समाज कल्याण, राजस्व विभाग प्रभावहीन पुलिस विभाग, प्रभावहीन कृषि विभाग, सिंचाई, पीएचई, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य, जिला पंचायत विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। राज्य के सीतारा मंत्री टीएस सिंह देव हो या मुख्यमंत्री के चहेते शिव हरिया और रविंद्र चौबे यहां प्रभावहीन हैं ऐसे में मंत्री अमरजीत और उमेश पटेल का नाम ही नहीं लिया जा सकता, इन्होंने तो इतना सीखा है कि बिलासपुर आना ही नहीं, यदि आ गए तो चुपचाप फीता कटे और चले गए बिलासपुर का मीडियम रास्ता देखता ही रह जाता है कि कोई मंत्री रुक जाए सिलसिलेवार तरीके से बात कर ले पर यदि लंबी बात मीडिया की किसी से होती है तो वह नाम केवल महिला आयोग की अध्यक्ष का है जिसके कहने या ना कहने का कोई फर्क ही नहीं पड़ता।