24hnbc आज का पंचांग 28 अक्टूबर 2022, शुक्रवार आज दूर्वा गणपति व्रत
Thursday, 27 Oct 2022 18:00 pm
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समाचार :-
राहुकाल सुबह 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक। दोपहर में 3 बजकर 30 मिनट से 4 बजकर 30 मिनट तक यमगंड रहेगा। सुबह 7 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक गुलिक काल रहेगा। दुर्मुहूर्त काल सुबह 8 बजकर 44 मिनट से 9 बजकर 28 मिनट तक और उसके बाद दोपहर में 12 बजकर 27 मिनट से 1 बजकर 12 मिनट तक। भद्रा रात को 9 बजकर 24 मिनट से सुबह 6 बजकर 31 मिनट तक।
राष्ट्रीय मिति कार्तिक 06, शक संवत् 1944, कार्तिक शुक्ल, तृतीया, शुक्रवार, विक्रम संवत् 2079। सौर कार्तिक मास प्रविष्टे 12, रवि-उल्सानी-01, हिजरी 1444 (मुस्लिम), तदनुसार अंग्रेजी तारीख 28 अक्टूबर सन् 2022 ई॰।
सूर्य दक्षिणायन दक्षिण गोल, हेमन्त ऋतु। राहुकाल पूर्वाह्न 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक। तृतीया तिथि पूर्वाह्न 10 बजकर 34 मिनट तक उपरांत चतुर्थी तिथि का आरंभ।
अनुराधा नक्षत्र पूर्वाह्न 10 बजकर 42 मिनट तक उपरांत ज्येष्ठा नक्षत्र का आरंभ। शोभन योग अर्धरात्रोत्तर 01 बजकर 29 मिनट तक उपरांत अतिगण्ड योग का आरंभ।
गर करण पूर्वाह्न 10 बजकर 34 मिनट तक उपरांत विष्टि करण का आरंभ। चंद्रमा दिन रात वृश्चिक राशि पर संचार करेगा।
आज के व्रत त्योहार : दूर्वा गणपति व्रत
सूर्योदय का समय 28 अक्टूबर 2022 : सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर।
सूर्यास्त का समय 28 अक्टूबर 2022 : शाम 5 बजकर 40 मिनट पर।
आज का शुभ मुहूर्त 28 अक्टूबर 2022 :
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 27 मिनट तक। विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 56 मिनट से 02 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। निशीथ काल मध्यरात्रि 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक। गोधूलि बेला शाम 5 बजकर 39 मिनट से 6 बजकर 5 मिनट तक। अमृत काल मध्यरात्रि 12 बजकर 53 मिनट से 2 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 30 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक। रवि योग 10 बजकर 42 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 31 तक।
आज का अशुभ मुहूर्त 28 अक्टूबर 2022 :
राहुकाल सुबह 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक। दोपहर में 3 बजकर 30 मिनट से 4 बजकर 30 मिनट तक यमगंड रहेगा। सुबह 7 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक गुलिक काल रहेगा। दुर्मुहूर्त काल सुबह 8 बजकर 44 मिनट से 9 बजकर 28 मिनट तक और उसके बाद दोपहर में 12 बजकर 27 मिनट से 1 बजकर 12 मिनट तक। भद्रा रात को 9 बजकर 24 मिनट से सुबह 6 बजकर 31 मिनट तक।
आज का उपाय : भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा करें और तुलसी के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
(आचार्य कृष्णदत्त शर्मा)