24hnbc कभी 323 फिर 307 फिर बाद में न गिरफ्तारी न चालन मामला ठंडे बस्ते में.....
Thursday, 13 Oct 2022 18:00 pm
24 HNBC News
24hnbc.com
समाचार :-
बिलासपुर, 14 अक्टूबर 2022। महीनों बीत जाते हैं पुलिस कई आपराधिक मामलों में जांच में शिथिलता बरती है एक उदाहरण शहरी थाने का और एक उदाहरण ग्रामीण क्षेत्र के थाने का। 3 मई 2022 को बिलासपुर के सिविल लाइन थाना ने एक प्रकरण में 323, 294, 34, 506 आईपीसी के तहत अपराध पंजीबद्ध किया। मारपीट में घायल युवक का मुलाहिजा हुआ सरकारी अस्पताल ने घायल को अपोलो रेफर कर दिया, बाद में इसी मामले में तत्कालीन एडिशनल एसपी ने बताया कि इस मामले में आरोपी के विरुद्ध 307 भी कायम की जा रही है उसके बावजूद इस मामले में मई के बाद जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर, अब अक्टूबर गुजर रहा है परंतु किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई बताया जाता है कि आरोपियों की संख्या आधा दर्जन से ज्यादा है। दूसरा उदाहरण ग्रामीण क्षेत्र के मस्तूरी थाने का है। एक युवा को असामाजिक तत्वों ने सड़क पर डंडे से पीटा मामले का वीडियो भी वायरल हुआ एडिशनल एसपी ग्रामीण के पास जब मारपीट की घटना का समाचार पहुंचा और पेपर बाजी हुई तो, 307 की धारा बढ़ाई गई। इस प्रकरण में भी 3 माह से ज्यादा बीत चुका है किंतु कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है पीड़ित पक्ष बताता है आरोपी लगातार गांव में देखे जाते हैं और विभिन्न माध्यमों से प्रार्थी पर दबाव भी बनाते हैं। कानूनी विशेषज्ञ बताते हैं कि एफ आई आर दर्ज होने के बाद जांच में धारा बढ़ती है किंतु 307 जैसी धारा लग जाने के बाद उसे जांच के दौरान ही काट देना आसान नहीं है पर इन दिनों बिलासपुर में यह सब हो रहा है एक तरफ पुलिस पर बेहतर कार्य प्रदर्शन लायन आर्डर कायम करने की जवाबदारी है, दूसरी तरफ कहते हैं कि राजनीतिक दबाव के चलते गंभीर आपराधिक मामलों में जांच कार्य जानबूझकर धीमी गति से होता है। आत्महत्या करके कोई संभ्रांत नागरिक अपना जीवन खत्म कर लेता है मृतक के सुसाइड नोट में नामजद उल्लेख होता है। सेशन कोर्ट से आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज कर दी जाती है, पर पुलिस उन्हें पकड़ने में कामयाब नहीं होती है। ऐसे में नागरिक कानून व्यवस्था पर कैसे भरोसा करेगा।