24hnbc रेलवे अर्थात देश की आत्मा 35 साल की लीज पर, पितृपक्ष मुबारक हो.....
Thursday, 15 Sep 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर,16 सितंबर 2022 । हते हैं जमीन का धंधा पंचतत्व का है और एक तत्व भी दुखी हो, धंधा करने वाले को बहुत नुकसान पहुंचाती है इस समय तो देश का सीईओ अपने दरबारियों के साथ ताबड़तोड़ जमीन बेचने पर लगा है और बिक्री पर है देश की आत्मा और यह दो तत्व हैं रेलवे और बैंक एक की बिक्री शुरू हो गई है और दूसरा पाइप में हैं। जब आम जनता को रोजगार मुहैया नहीं हो रहा है बाजार से उत्पादक भी गायब हो रहे तभी सरकार ने इसी माह की 7 तारीख को रेलवे की जमीनें बेचने का निर्णय लिया। यह जमीन 5 साल के स्थान पर 35 साल की लीज पर दी जाएगी और भूभाटक घटाकर 1.5% कर दिया गया पहले यह 6 परसेंट था। रेलवे की जमीनें बेचने के पूर्व सीईओ साहब 17 बंदरगाह और 7 हवाई अड्डे बेच चुके हैं । जिस तरह से बिक्री जारी है देश की अखंडता और संप्रभुता पर खतरा बढ़ गया है ऐसे में यूएपीए के तहत इन पर तो मामला दर्ज हो जाना चाहिए पर जिसकी लाठी . ..... कल्पना करें कि आज भी रेलवे का एक्ट इतना प्रभावशाली है कि उसकी खुली संपत्तियों को भी कोई हाथ भी नहीं लगाता डरते हैं क्या यह प्रभावशाली था जमीन बिक्री के बाद शेष रहेगी। पहले बंदरगाह फिर रेलवे अर्थ साफ है देश का लॉजिस्टिक बेचा जा चुका है। अनाज एक माह में 5 से 10% महंगा हुआ है। महंगाई दर 7% पर है दूध 6.50% महंगा हुआ फल 750% महंगे हुए दाल 2.5% महंगी हुई इस माह देश की ग्रोथ रेट 2.4% है जो पूर्व से 10% कम है। रेलवे का जो लॉजिस्टिक बेचा जा रहा है उसे से मात्र 30000 करोड रुपए की कमाई होगी और रोजगार पर जो प्रभाव पड़ेगा वह समाज को और बर्बादी की स्थिति में ले जाएगा अभी रेलवे के लॉजिस्टिक्स 10 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है जिसमें से मात्र 1500 नियमित हैं निजीकरण का डाटा बताता है कि जिस काम पर सरकार 100 लोगों को रखती है निधि क्षेत्र उसी काम को मात्र 12 लोगों से पूरा कर आता है तो ना 10 लाख लोगों की जरूरत है ना 1500 नियमित कर्मचारी की, बिक्री के लिए 12 मंत्रालय लगे हैं सरकार व्यवसाय नहीं करना चाहती अच्छी बात है किंतु अब तो वह निगरानी भी नहीं करना चाहती निगरानी को भी बेचा जा चुका है इससे इनकार नहीं किया जा सकता। 11 मंत्रालय के 23 पीएसयू बिक्री के कतार में है पूर्व की अपेक्षा इनका प्रॉफिट घटकर आधा हो गया है और अब ये 5944 करोड़ की ही प्रॉफिट में बचे हैं कुल मिलाकर हालत खराब से खराब हो रही है एक छोटे से उदाहरण से समझें भारत में पीने के पानी का धंधा प्रतिवर्ष 6 लाख करोड़ का लाभ देता है जबकि नल जल योजना पर मात्र 50000 करोड़ खर्च होता है और अभी तक केवल गोवा में ही यह योजना पूरी हुई है आप स्वयं समझते हैं कि गोवा का जन घनत्व कितना है। कीचड़ ने तय किया है वह 50 साल रहेगा तभी तो 35 साल की लीज दे रहा है। किसी को लगता होगा कि सब कुछ बिक जाएगा संसद तो बचेगी तो वह गलत सोचना है। पिछले 5 साल का संसदीय प्रश्नों का हिसाब देखें 70% प्रश्न कारपोरेट को लाभ पहुंचाने के नियत से पूछे गए इसका अर्थ साफ है कि इतने प्रतिशत सांसद इन्हीं से प्रायोजित होकर संसद में पहुंचते हैं या संसद में पहुंचकर प्रायोजित हो जाते हैं।