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24hnbc नींद से जागने का नाटक किया निगम ने, असल खेल तो बेलतरा से टिकट का है
Wednesday, 24 Aug 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । मोपका, चिल्हाटी, खमतराई, बहतराई कुछ वर्ष पूर्व ग्राम पंचायतें हुआ करती थी। नगर पालिक निगम बिलासपुर का सीमा विस्तार करते हुए इस क्षेत्र को निगम में शामिल किया। दर्जनों कालोनियां जो ग्राम पंचायत को पैसा खिलाकर बन गई थी वे सब निगम में आ गई। निगम के निर्वाचित जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी चाहते तो इन सब कालोनियों का नियमितीकरण करते हुए बड़ी धनराशि निगम के खजाने में ला सकती थी पर ऐसा नहीं हुआ। बताते हैं कि कुछ अधिकारियों ने और कुछ जनप्रतिनिधियों ने अवैध कालोनियों के निर्माताओं से मोटी रकम लेकर अपने जेब में डाल ले ली, कल ही निगम के अमले ने नींद से जागने का नाटक किया और चिल्हाटी स्थित ग्लोरियस सिटी में अपना बुलडोजर खड़ा कर दिया। पूरे देश में बुलडोजर न्याय का प्रतीक बना घूम रहा है और बिलासपुर में केवल दिखावटी नखरे किए जा रहे हैं। 24hnbc ने तो 2 वर्ष पूर्व ही ग्लोरियस सिटी के अवैध होने का समाचार प्रकाशित किया था। उस क्षेत्र में टीएनसी अनुमति प्राप्त कालोनियों की सूची कोई भी प्राप्त कर सकता है और देख सकता है कि उससे कई गुना ज्यादा कॉलोनी क्षेत्र में है। कुछ अवैध कालोनियों में तो भव्य प्रवेश द्वार भी बने हुए हैं देख कर ऐसा लगता है कि यह सब तो नियम मानते ही होंगे पर ऐसा नहीं है। ग्लोरियस सिटी के मामले में नियमितीकरण मैं सबसे बड़ा पेंच ईडब्ल्यूएस की जमीन है बंधक प्लाट है क्योंकि पूरी कॉलोनी ही अवैध है इसलिए इस कॉलोनी के भीतर ना तो ईडब्ल्यूएस की जमीन छोड़ी गई ना ही प्लाट बंधक रखे गए ऐसे में निगम चाहे भी तो बंधक प्लाट को बेचकर विकास कार्य नहीं करा सकता। बिल्डर के ऊपर बड़ी धनराशि बतौर जुर्माना लगानी होगी यदि नियम विरुद्ध तरीके से छूट दी गई तो आने वाले समय में बड़ी ऑडिट आपत्ति भी होगी। अब समझे इस क्षेत्र का राजनीति का गणित नगर पालिक निगम बिलासपुर के ये अधिकांश वार्ड बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं और यह विधानसभा फिलहाल भाजपा के खाते में हैं किंतु इस क्षेत्र से अगले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के कई नेता टिकट का दावा रखते हैं इनमें से कुछ नेता ऐसे भी हैं जो निगम में बड़े निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं कालोनियों का नियमानुसार नियमितीकरण कर दे तो चुनावी बजट गड़बड़ा जाता है क्योंकि चुनाव के वक्त जो खर्चा लगने वाला है उसकी पूर्ति तो अवैध कॉलोनी निर्माणकर्ताओं से ही होगी और नियमितीकरण कर दे तो वोट में कुछ इजाफा जरूर होता है इन दोनों के बीच जिस दिन संतुलन बैठ जाएगा इस क्षेत्र की कालोनियों का नियमितीकरण हो जाएगा पर उसके पहले अवैध कॉलोनी बनाने वाले बिल्डर कितनी जेब खाली करेंगे यह देखने लायक है पिछली बार तो 20 किताब में सौदा हो गया था ऐसा विकास भवन के गलियारे में सुना जाता है और यह सौदा केवल ग्लोरियस के संदर्भ में था जहां नींद से जागने का नाटक करते हुए निगम का अमला कल जेसीबी लेकर पहुंचा था इस कॉलोनी के भीतर 12 नहीं 150 मकान है।