24hnbc अमर का दावा बिलासपुर में क्यों पड़ता है कमजोर
Monday, 25 Jul 2022 00:00 am
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी ने फिर से संगठन मंत्री नियुक्त किया है इस बार भी परंपरा के अनुसार इस पद पर आरएसएस से भेजे गए व्यक्ति को यह पद मिला है माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के लिए अब भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व छत्तीसगढ़ पर ध्यान दे रहा है वैसे तो बिलासपुर जिले में तुलनात्मक रूप से दिखाई जाए तो कांग्रेस की हालत खराब रही किंतु भाजपा की नाक तब कट गई जब जिला मुख्यालय से वे बिलासपुर विधानसभा सीट हार गए । विधायक बड़े मंत्री अमर अग्रवाल का हारना पार्टी का किला ढह जाने के समान था। ऊपर से उन्हें राजनीति के नौसिखिये कांग्रेस प्रत्याशी शैलेश पांडे ने हराया था। कांग्रेस हाईकमान ने बिलासपुर सीट जीतने के लिए विशेष रणनीति बनाई थी और अपने पार्टी के स्थानीय नेताओं के राय के विपरीत नए चेहरे शिक्षाविद शैलेश पांडे को मैदान में उतारा हाईकमान का निर्णय सही साबित हुआ और भाजपा का किला अमर अग्रवाल जिस पर आसपास की 10 -12 सिटी जिताने की जिम्मेदारी होती थी वह स्वयं हार बैठा तब से अब तक बिलासपुर में टिकट की सीधी दावेदारी कोई नहीं करता हालाकी अंदर ही अंदर टिकट के दावेदार गंभीरता से काम कर रहे हैं ऐसी सूचना है और यह वे लोग हैं जो पार्टी के लिए दो दशक से काम कर रहे हैं अर्थ यह हुआ कि इस बार जो टिकट का दावा करेगा वह तब से पार्टी से जुड़ा है जब अमर अग्रवाल भाजपा के प्राथमिक सदस्य भी नहीं थे सब जानते हैं कि अमर अग्रवाल की राजनीतिक सफर की शुरुआत भारतीय जनता युवा मोर्चा से हुई और बिलासपुर जिले से अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, संत कुमार नेताम ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के एक समान पदों पर राजनीतिक सफर शुरू किया था। 2003 में दूसरी बार विधायक बनते ही अमर अग्रवाल को कैबिनेट मंत्री का पद प्राप्त हुआ डॉक्टर रमन ने उन्हें खजाने की चाबी दे दी स्वास्थ्य मंत्रालय जैसा विभाग दे दिया जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ में उनकी तूती बोलती थी अपने ही पैरों पर गलती से उन्होंने कुल्हाड़ी भी मारी जब उन्होंने अति आत्मविश्वास में डॉक्टर रमन मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा दे दिया था। पलक झपकते डॉक्टर रमन ने स्वीकार किया और राज्यपाल को प्रेषित कर दिया दोबारा मंत्री बनने के लिए अमर अग्रवाल को काफी इंतजार करना पड़ा था। भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी राजनीति में माना जाता था कि वे पार्टी में 15 से 17 टिकट तय करते हैं और इस बार विधानसभा चुनाव के लिए पहले खुद की दावेदारी कर रहे हैं। इस बीच में उन्होंने कई बार राज्य सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर मीडिया की सुर्खी भी बटोरी पर लंबे समय तक सत्ता में रहने मंत्री बने रहने के बावजूद अपनी ही विधानसभा बिलासपुर का विकास ना कर पाना आज भी उन्हें बैकफुट पर ढकेल ता है यही कारण है कि बिलासपुर की जनता अभी भी उन्हें स्वीकार नहीं कर सकती।