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24hnbc डिजिटल मीडिया की अंतहीन गिरावट, पुरुषवादी सोच के साथ लिखने की है आदत
Sunday, 24 Jul 2022 00:00 am
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। दैहिक शोषण, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, घरेलू हिंसा से लेकर चटखारे लेकर पढ़े जाएं समाचार कि रो में डिजिटल मीडिया इस तरह बह गया है कि पत्रकारिता की एथिक्स को रोज नौसिखिया तो नौसिखिया पुराने पत्रकार भी डस्टबिन में डालते नजर आते हैं। डिजिटल मीडिया को जब तक सरकार नियमों के दायरे में लाएगी उसके पूर्व मनोरमा सत्य कथा, सच्ची घटनाएं से लेकर मस्तराम तक की शैली में खबरें लिखी जाती रहेंगी। समाज जिन्हें अपना रोल मॉडल मानने लगता है उसके पीछे तो हाथ धोकर पीछे पड़ जाता है। हमने बिलासपुर शहर की पत्रकारिता के बारे में बहुत से आद आदर्शात्मक व्याख्यान सुने हैं किंतु इन्हें इन दिनों वास्तविकता के रूप में उतरते नहीं देख रहे हैं। पत्रकारिता में पुरुषवादी सोच इतनी हावी होती जा रही है कि घरेलू हिंसा के मामलों में भी थाने के अंदर तक की फोटो छाप दी जाती है, नाम बदलना तो दूर पीड़िता और अभियुक्त के काम धंधे तक की पूरी जानकारी दे दी जाती है कोई न पहचानता हो तो भी पता चल जाए की खबर किसके बारे में लिखी जा रही है। शारीरिक शोषण रिश्तो की मर्यादा को भंग करते हुए दैहिक शोषण की खबरें इस तरह लिखी जाती है कि पाठक वर्ग उसे किसी खाद्य वस्तु की रेसिपी के समान आनंद ले कर पढ़ें। बलात्कार के मामलों में भी पीड़िता का नाम बदलकर लिखना भी गलत है। ऐसी खबरों में भी मोहल्ले का नाम लिख दिया जाता है पीड़िता का व्यवसाय बता दिया जाता है कुछ जगह इस तरह की खबरों में जहां पीड़िता का नाम स्पष्ट होना चाहिए वहां दवा दिया जाता है। 
24 जुलाई सिविल लाइन थाना क्षेत्र की खबर है घरों में काम करने वाली में मैड छठी मंजिल से गिर कर मर गई खबर में अपार्टमेंट का नाम, फ्लैट क्रमांक नहीं बताया जा रहा है घटना कैसे हो गई यह भी नहीं बताया जा रहा है मृतक का नाम बड़े अच्छे से लिखा है उसके पति का नाम भी लिखा है किंतु किस फ्लैट में काम कर रही थी फ्लैट का मालिक कौन था फ्लाइट का नंबर क्या है आदि को लिखा ही नहीं गया लगता है मामला कचरा फेंकने तक नहीं है कहने का अर्थ यह है कि जहां छुपाना चाहिए वहां बताया जाता है जहां बताया जाना चाहिए वहां छुपाया जा रहा है। इन दिनों तो मीडिया का हाल देश की राजधानी से राज्यों की राजधानी तक और संभागीय मुख्यालय से जिला मुख्यालय तक जनपद से ब्लॉक तक ब्लॉक से पंचायत तक बेहाल है जिसे देखो वह स्वयं को स्टेट हेड या सीईओ बता कर चलता है।