24hnbc यह नहीं है लोकतंत्र अब चल रहा पेराई तंत्र
Sunday, 10 Jul 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारत देश के लोगों ने अपने भौगोलिक सरहदों के भीतर जिस शासन व्यवस्था की कल्पना की और उसे रेखांकित करके जहां लिखा उसे हम संविधान कहते हैं। पिछले 8 वर्षों में उस लोकतंत्र की परिभाषा सर्वाधिक बदल गई है जिसमें जनता चुनाव में उतरे प्रत्याशियों के बीच में से अपना मत देकर जिसे भी चुनकर भेजती है वह यदि देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का नहीं है तो किसी ना किसी तरह उसे खरीदा जाएगा और अपने दल में लिया जाएगा राजनीतिक पार्टी को यह समझ आ चुका है कि देश के करोड़ों करोड़ों लोग उसे अपना वोट नहीं देते अर्थात उसकी नीति को पसंद नहीं करते इतने करोड़ों लोगों पर दबाव नहीं डाला जा सकता किंतु हजारों लोगों के वोट से जीते एक आदमी पर तो दबाव डाला जा सकता है और उसे वैसा बनाया जा सकता है जैसा वह चाहते हैं इन दिनों यही हो रहा है लिहाजा लोकतंत्र की परिभाषा अब जनता के द्वारा जनता के लिए जनता पर शासन नहीं है जनता के द्वारा चुने हुए कुछ खास लोगों का देश के 13000 लोगों के लिए बनाई जा रही नीति लोकतंत्र का अर्थ हो गया है कोई माने या न माने भारत सरकार इन दिनों देश के 13000 लोगों के लाभ के लिए अपनी नीतियां बनाती है या यूं कहें इन 13000 लोगों को जो लाभप्रद लगता है वहीं सरकार की नीति हो जाती है । जीएसटी जिसे बड़े नाटक के साथ रात को 12:00 बजे लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर में से लागू किया गया उसका एक उदाहरण देखिए आटे पर 5% जीएसटी और हीरे पर 1.5% जीएसटी इसलिए कहते हैं हीरा है सदा के लिए और आटा तो अभी खाओ 2 घंटे बाद बाहर रोज-रोज लेना है तो उस पर 5% और हीरा है सदा के लिए आपके मेरे और हम जैसे करोड़ों के जीवन में शायद ही कोई मौका आता हो जब हम हीरे की कीमत दुकान पर जाकर पूछते होंगे कभी जरूरत पड़ गई तो वहां भी एडी है ना जिसे अमेरिकन डायमंड कहा जाता है लेकर काम चला लेते हैं। इस उदाहरण के अलावा कुछ उदाहरण और भी हैं खुला दूध स्वास्थ्य के लिए खराब है पहले यह विज्ञापन दिखाओ फिर पैकेट बंद दूध पर जीएसटी लगाओ। लस्सी पर 12%, मट्ठा जो हमारी जड़ों में डाला जा रहा है उस पर भी 12% अस्पताल के बिस्तर पर 18% हेल्थ बीमा पर 18% क्या यह लग्जरी है 1000 से कम वाले होटल कमरा किराए पर 12% उसके बाद भी क्या आप मानते हैं कि यह आपके द्वारा चुनी गई सरकार है जो आपके लिए काम कर रही है सरकार को पता है जनता में नाराजगी रहेगी इसकी तैयारी उन्होंने पहले ही कर रखी है कानून में परिवर्तन किए हैं 2 साल पहले ही पर्सनल आईडेंटिफिकेशन बिल पास करा लिया गया । राहुल गांधी जैसे कुछ सांसदों ने ही विरोध दर्ज कराया इतना ही नहीं कोर्ट हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन, टोल प्लाजा पर इतने हाई फ्रिकवेंसी कैमरे लगे हैं जो 50 की भीड़ में भी चाहे गए बताए गए चेहरे को ढूंढ देंगे अर्थात ऐसे लोग जो सरकार के खिलाफ बोलते हैं लिखते हैं या कुछ करते हैं उनकी हर गतिविधि पर सरकार की नजर है। इतना ही नहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जब कभी भी नौकरशाहों को संबोधित करते हैं उन्हें उन्हें देश के भीतर होने वाले नागरिक विद्रोह आंदोलन से कैसे निपटें पर सलाह देते हैं। किसान आंदोलन, सी ए ए आंदोलन से इसी तरह निपटा गया मतलब देश की निर्वाचित सरकार को उसके चाहेतो को यह पता है कि उसकी आर्थिक नीतियों के कारण नागरिकों में गुस्सा है और इस गुस्से को शांत करने का कोई इरादा नहीं है उसे से निपटने का इरादा है अब तो जिस मध्यमवर्ग को आंदोलन के लिए पहचाना जाता था उसे सरकार ने शतत एमसी पर रख दिया है । इतना और लगातार रक्त स्राव होगा कि मिडिल क्लास कुछ दिन के बाद उठने लायक नहीं बचेगा सरकार गन्ना मशीन हो गई है और नागरिकों को पेर रही है जब तक रस है पेरेगी अंत में भूरा बनने पर जला दिया जाएगा।