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24hnbc अब तो पत्थर खदान राखड़ से हुई ड़म्प, बिकेगा छोटा प्लांट
Thursday, 09 Jun 2022 18:00 pm
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समाचार -   मस्तूरी / बिलासपुर
बिलासपुर। कुछ दिन पूर्व तक जिन पत्थर खदानों में 60 फीट नीचे से पत्थर निकाला जा रहा था । अब वह सपाट मैदान में तब्दील हो रही हैं कुछ ही दिन में राखड़ के ऊपर मिट्टी डली नजर आएगी और यहां पर भी छोटे प्लॉट बेचने का धंधा प्रारंभ हो जाएगा । हमारा बिलासपुर के नागरिकों से करबद्ध निवेदन है कि मस्तूरी की तरफ बिल्हा की तरफ जब कभी भी छोटा प्लाट खरीदे या बड़ा, खरीदने के पूर्व 5 फीट खोद कर देख ले जिस जमीन को वे खरीदना चाह रहे हैं उसमें मिट्टी कितने फिट तक है सामान्य तौर पर जमीन की ऊपरी सतह जो कि 10 से 15 फिट होती है जहां तक मिट्टी पाई जाती है इसके नीचे रेत, पत्थर भी हो सकते हैं किंतु अब ऐसा नहीं है। बिलासपुर के दो क्षेत्र मस्तूरी और बिल्हा में पुरानी पत्थर खदानों को पावर प्लांट के राखड़ से भरा जा रहा है। इस भराव की गहराई 40 से 60 फीट तक है और पर्यावरण के नियमों को ताक पर रखकर इसे भरा गया है यहां तक की जिस पावर प्लांट से राखड़ ली जा रही है उस पावर प्लांट से भी अनुमति नहीं ली गई है। संबंधित एसडीएम ने निश्चित समय सीमा में पटाओ की अनुमति दी थी जो अब निरस्त हो चुकी है इसलिए खदान पाटाने के लिए एनटीपीसी पावर प्लांट से राखड न लाकर केएसके से लाई जा रही है । हमारी जानकारी के मुताबिक यह पत्थर खदान ढाई एकड़ से ज्यादा में फैली हुई थी और अब पूरी तरह से पाठ दी गई है कुछ स्थानों पर मिट्टी भी दिखाई देने लगी है जो कि कुछ ही दिनों में फैला ली जाएगी और पूरा क्षेत्र सपाट मैदान दिखाई देगा राखड से 40 से 50 फीट गहराई पाठ देने से क्षेत्र का वाटर रिचार्ज सिस्टम पूरी तरह बर्बाद हो रहा है जिसका परिणाम कुछ वर्ष बाद दिखाई देगा। इस जमीन को यदि टुकड़ों में प्लाटिंग कर बेज दिया गया तो इस पर बोरिंग नहीं कराई जा सकती और यह बात क्रेता को बताएगा कौन...... यहां तो जमीन बेचने वाले बोर्ड लगा कर बेज कर निकल लेते हैं और परिणाम निर्दोष क्रेता को भुगतना पड़ता है । 
खदान पाटने में जो ट्रांसपोर्टर रात दिन राखड ला रहे हैं उनके पास भी मौके पर एक भी ऐसा दस्तावेज नहीं होता जिसे देखकर यह पता चले कि यह डंपिंग वैध है या नहीं।