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24hnbc बिलासपुर में कांग्रेस की चला चली की बेला कारवां लूटा तो जिम्मेदार कौन.....?
Friday, 03 Jun 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। 3 जून, जून माह के प्रथम सप्ताह के आखरी कार्य दिवस पर जिला पंचायत ग्रामीण विकास स्वास्थ्य और जीएसटी के मंत्री टी एस सिंह देव ने विभागीय समीक्षा बैठके की बैठक में विपक्षी दलों के वे विधायक भी शामिल थे जिन का वास्ता इस क्षेत्र की विधानसभाओं से है। बैठक के भीतर नेता प्रतिपक्ष और विभागीय मंत्री के बीच जो वार्तालाप हुआ उसी से स्पष्ट हो गया कि विभागों पर मंत्री महोदय की पकड़ नहीं है। हमने बिलासपुर जिले में जयसिंह अग्रवाल को प्रभारी मंत्री बनाए जाने पर लिखा था समस्या का अंत या प्रारंभ आज वह शीर्षक सत्य साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में बिलासपुर जिले के प्रभारी मंत्री के रूप में पहले ताम्रध्वज साहू फिर रविंद्र चौबे और उसके बाद जयसिंह अग्रवाल को यह जिम्मेदारी दी गई। जिले में विभिन्न विभागों की प्रशासनिक कसावट का सबसे शिथिल प्रदर्शन तभी से दिखाई दे रहा है जबसे प्रभारी मंत्री के रूप में राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कामकाज संभाला, अपनी नियुक्ति के पश्चात कुछ समय तो वे बिलासपुर पर ध्यान दे रहे थे किंतु बिलासपुर में किसकी चलती है इसको समझने के बाद शायद उन्होंने अपने आप बिलासपुर पर ध्यान देना बंद कर दिया, सही भी है उन्हें बिलासपुर से चुनाव नहीं लड़ना है जहां से लड़ना है और जीतना है वहां पर ध्यान देना बेहतर है । बिलासपुर की प्रशासनिक देखभाल की जिम्मेदारी प्रशासनिक आदेशों के तहत किस की बनती है और बिलासपुर जिले में आज तक कितने विभाग के मंत्री ऐसे हैं जिन्होंने कभी अपनी विभागीय समीक्षा बैठक बिलासपुर में की ही नहीं, ऐसे में अब जब चला चली की बेला है जैसा कि कल धरमजीत ने कहा तो जागने से क्या फायदा होने वाला है। बिलासपुर जिले में कल जब जिला पंचायत की परत दर परत असफलता खुल रही थी तो यह समझ आता गया कि गलती उस निर्वाचित जनप्रतिनिधि की थी जिसे चुनकर जनता ने विभिन्न निर्वाचित संस्था में भेजा है इस जिम्मेदारी से ना तो सत्ता पक्ष बच सकता है और ना ही विपक्षी जनप्रतिनिधि। हालांकि विपक्षी नेताओं को यह कह कर पल्ला झाड़ना आसान है कि हम तो हर योजना की असफलता पर बोलते थे पर सत्ता हमारी थोड़ी ना है काम तो निर्वाचित सरकार को करना है किंतु इतना कहने से चौकीदारी खत्म नहीं हो जाती, क्योंकि यह वही चौकीदार हैं जिन्होंने जब चाहा तब इनकी मर्जी से तहसीलदार, एसडीएम बदले गए और आज सिर्फ यह कह देने से कि निलंबित कर दो निलंबित कर दो और बैठक छोड़कर चले गए अरे यह तो वह सरकार है जिसके मंत्री की विधानसभा में निलंबन घोषणा के बावजूद भ्रष्ट सरकारी कर्मचारी बताया नहीं जाता और इसे अब 42 दिन से ज्यादा हो चुका है ऐसे में निलंबन कोई कार्यवाही नहीं है। कल मंथन में सब ने देखा कि सौम्य, सुशील सदा हंसमुख दिखने वाले कैबिनेट मंत्री टी एस सिंहदेव किस तरह तेज विहीन नजर आ रहे थे। प्रशासनिक मामलों के राजनीतिक मसालों के जानकार यह समझ रहे हैं कि बिलासपुर में कांग्रेस सरकार के दौरान जो गड़बड़ियां हुई है उनकी जिम्मेदारी उन्हीं लोगों की है जिनके पास संविधानएतर शक्तियां सीएम साहब ने दे रखे हैं। बिलासपुर प्रशासनिक दुर्दशा की जिम्मेदारी उन्हीं की है जिन्हें चुनाव में जनता नकार चुकी है और जनता के द्वारा नकारे गए नेता को जब कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अघोषित पावर दे देता है और नौकरशाही का प्रधान ऐसे अघोषित प्रमुख की मांगने लगता है तो परिणाम यही होता है जो बिलासपुर का हो रहा है।