24hnbc अंकित गौराहा जहां रहे विवादित रहे....
Monday, 30 May 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । युवा कांग्रेस चुनाव में जिला पंचायत सदस्य अंकित गौराहा का यह आरोप की मतदान के लिए स्वास्थ्य विभाग की मितानिन का उपयोग किया जा रहा है, आधा सत्य है। यदि इस बात की जांच का दायरा स्वास्थ्य विभाग से बढ़ाकर मनरेगा, महिला एवं बाल विकास विभाग, जनपद तक किया जाए तो एक बड़ा खेल बाहर आएगा किंतु यहां आरोप लगाने वालों की नियत ही साफ नहीं दिखाई देती आरोप लगाने वाले नेता स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के पत्र को तो दिखा रहे हैं किंतु जिस पत्र के कारण स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने उनके साथ पत्राचार किया उस पत्र को कोई नहीं दिखा रहा। यहां यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि जिला पंचायत के चुनाव के वक्त जब प्रत्याशी आम जनता के बीच चुनाव प्रचार कर रहे थे तब कुछ प्रत्याशियों को उनके नातेदार, प्रशासनिक अधिकारियों के कहने पर स्वास्थ्य विभाग की इन्हीं मितानिनो ने हार जीत में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। सब ऐसे आरोप प्रत्यारोप नहीं लगे और इस बार युवा कांग्रेस चुनाव में ऐसे आरोप ऐसे व्यक्ति के द्वारा लगाए जा रहे हैं जिसे स्वास्थ्य मंत्री, जिला पंचायत मंत्री के खेमे का माना जाता है। यह बात अब छिपी हुई नहीं है की यूथ कांग्रेस के चुनाव में एक तरफ रुपयों की बरसात हो रही है दूसरी तरफ तृतीय-चतुर्थ श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों के द्वारा काम भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग में अतिरिक्त रुचि रखने वाले किस खेमे के नेता यूथ चुनाव में मितानिन का उपयोग कर रहे हैं यह खोज का विषय है। यूथ कांग्रेस चुनाव में बिलासपुर जिले में 3 विशेष ग्रुप काम कर रहे हैं। एक खेमा पर्यटन का बताया जाता है, एक खेमा सीएम का बताया जाता है, एक खेमा स्वास्थ्य का बताया जाता है, एक खेमा पुराने यूथ कांग्रेस का बताया जाता है यह भी कहा जाता है कि एक संसदीय सचिव को भी यूथ कांग्रेस के चुनाव में गहन दिलचस्पी है। जिला पंचायत सदस्य को यह भी बताना चाहिए कि मितानिन इस खेमे के लिए काम कर रही है अब जब यह स्पष्ट ही हो गया है कि यूथ कांग्रेस के चुनाव में कुछ सरकारी कर्मचारी इंवॉल्व है, तो बात पूरी तरह खुलना चाहिए क्योंकि जिला पंचायत सदस्य के आरोप लगाने के बाद ही छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष को कांग्रेस पर आरोप लगाने का मौका मिला वैसे जिला पंचायत सदस्य के द्वारा जो आरोप लगाए गए हैं वे पार्टी की अनुशासन को भंग करने की श्रेणी में भी आती है ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष को भी यह संज्ञान लेना चाहिए की कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि इस तरह से अपने ही पार्टी के खिलाफ आरोप कैसे लगा सकता है। क्योंकि अंकित गौराहा का पूर्व इतिहास छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस से जुड़ा रहा है जहां पर वे आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप में पहचाने जाते थे, और उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना में एक शर्मा नाम के अभियंता के भ्रष्टाचार को उजागर किया था और बाद में सेटलमेंट होने ना होने के आरोप प्रत्यारोप के साथ छजका के पदाधिकारी ने उन्हें पार्टी से निकालने की बात कही वही अंकित गौराहा ने पार्टी से त्यागपत्र की बात कही थी।