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24hnbc सत्ता अडानी के साथ कैसे बचेंगे जल, जंगल और जमीन
Sunday, 01 May 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। हेडिंग को ऐसा समझे जल धन जंगल और जमीन बराबर आदिवासी यह हालत है छत्तीसगढ़ की पूरा मामला पारा कोयला ब्लॉक में खनन अनुमति से जुड़ा है। यह कोयला ब्लॉक राजस्थान के विद्युत मंडल कंपनी को मिला और इसकी खुदाई की अनुमति के बाद इस संदर्भ में अडानी को फ्री हैंड हमारी रिपोर्ट 30 जनवरी 2022 को भी पढ़ा जा सकता है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए ने छत्तीसगढ़ के मुख्य वन्य जीव वार्डन से स्पष्टीकरण मांगा कि बगैर एनबीडब्ल्यूएल के पूर्व अनुमति के पारा कोयला ब्लॉक में खनन गतिविधियों के लिए वृक्ष कैसे काटे गए पूरा मामला हसदेव अरण्य में परसा ओपन कास्ट खनन परियोजना से जुड़ा है 6 अप्रैल को छत्तीसगढ़ सरकार ने पेड़ों की कटाई और खनन गतिविधियों में अंतिम मंजूरी दे दी यहां आदिवासी कार्यकर्ता चिपको आंदोलन जैसा विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं पेड़ों की कटाई और खनन से 700 से अधिक लोग विस्थापित होंगे मंजूरी गैर वन उपयोग के लिए दी गई है। परसा कोल ब्लॉक राजस्थान विद्युत उत्पादन लिमिटेड को आवंटित है और अडानी इंटरप्राइजेज को माइन ऑपरेटर और डेवलपर की जिम्मेदारी मिली है। अनुपम दत्ता की शिकायत पर 10 अप्रैल को 10 आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर हुई आदिवासी नागरिकों का यह आंदोलन 10 साल से चल रहा है। कोयला खनन का पहला चरण 2022 में होना था जो कि निर्धारित समय से पहले ही समाप्त हो गया इस संदर्भ में विस्तृत रिपोर्ट 30 जनवरी 2022 को प्रकाशित की गई है। दूसरे चरण के लिए 1136.328 हेक्टेयर भूमि के ब्यापतवरतन की मंजूरी दी गई आंदोलनकारी कहते हैं कि परसा और केटे गांव के जंगल में 242670 पेड़ कटेंगे सरगुजा, कोरबा और सूरजपुर जिलों में हसदेव अरण्य 170000 हेक्टेयर में फैला है और यह हाथी माइग्रेशन कारीडोर भी है इसी में महानदी की सहायक नदी हसदेव का केचमेंट एरिया भी है 2009 में इसे नोगो जोन घोषित किया गया था ।