24hnbc छत्तीसगढ़ में केंद्र की सर्जिकल स्ट्राइक समझे क्या अंतर है अटल और मोदी में
Wednesday, 20 Apr 2022 00:00 am
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। आने वाला समय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लिए कठिन होने जा रहा है। जब भाजपा के हाईकमान ने देखा और पाया की भाजपा की छत्तीसगढ़ राज्य इकाई उनके नेता प्रतिपक्ष पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस की सरकार को काउंटर नहीं कर पा रहे हैं और एक के बाद एक बाय इलेक्शन में हार हो रही है तो केंद्र के 9 मंत्री छत्तीसगढ़ में सीधी समीक्षा बैठक करने लगे। जो मंत्री दिल्ली से छत्तीसगढ़ आए हैं उनमें ज्योतिराजे सिंधिया जैसे पूर्व कांग्रेसी नेता भी हैं सिंधिया को छत्तीसगढ़ भेजने के पीछे कहीं ना कहीं कांग्रेस पार्टी में तोड़फोड़ की स्थिति पैदा करना है सब जानते हैं सिंधिया कांग्रेस में रहे लिहाजा कांग्रेस के अंदर अभी भी उनके चाहने वाले हैं तो कांग्रेस की छत्तीसगढ़ इकाई में असंतुष्टों को खोजो और भाजपा की तरफ लाने की कोशिश करो। यदि कांग्रेस से असंतुष्ट भाजपा में ना आए तो कांग्रेसी स्वभाव वाले ऐसे नेता जो हाशिए पर पड़े हैं या जिन्होंने कभी भी अजीत जोगी की पार्टी ज्वाइन कर ली थी उनसे भी संपर्क बढ़ा लो ऐसे में पहला नाम लोरम विधायक का है वैसे 9 मंत्रियों का प्रथम एजेंडा बस्तर, अंबिकापुर, जयपुर की तरफ है वह मैदानी क्षेत्रों की ओर देखना फिलहाल नहीं चाहते इसलिए सबसे पहले नक्सल प्रभावित 7 जिलों की निगरानी की जा रही है। कोरबा कोल माफिया का गढ़ होने के कारण भाजपा वहां भी नजर रखे हैं इसीलिए अश्विनी कुमार चौबे को कोरबा की जिम्मेदारी दी गई है। 9 मंत्री एक साथ किसी राज्य में जाएं तो जिस राजनैतिक दल का वह प्रतिनिधित्व करते हैं उसके स्थानीय नेताओं में खासकर सांसदों में नाराजगी स्वाभाविक है ऐसा माना जा सकता है कि स्थानीय सांसदों को जब काबिल नहीं माना गया तभी तो केंद्र से मंत्री भेज दिए गए । 2001 से 2003 के बीच अटल बिहारी वाजपेई वाली भाजपा सरकार ने भी कुछ इसी तरह की कार्यवाही की थी किंतु उसमें एक अंतर था उन्होंने छत्तीसगढ़ के 3 सांसदो को पहले केंद्र में मंत्री बनाया और फिर छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी के मुकाबले के लिए भेजा पाठकों को याद दिलाना जरूरी है कि वे तीन चेहरे रमेश बैस, रमन सिंह और स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव थे।