24hnbc कोविड का 2 साल और अब बिलासपुर के विश्वविद्यालयों में एक साथ क्यों हो रहे समारोह
Tuesday, 19 Apr 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। देश में शिक्षा के क्षेत्र में इन दिनों निजीकरण की जो बयार बह रही है। बिलासपुर इससे अछूता नहीं है किसने सोचा था की वह धंधा जिसमें मंदी नहीं आती। कोविड-19 के कारण वेंटिलेटर पर पहुंच जाएगा और अब सूखे हुए पौधे के दोबारा लहलहाने के दिन आ गए हैं किसी भी शिक्षा व्यावसायिक ने कोविड-19 से कोई सीख नहीं ली तभी तो परिस्थितियां जैसे ही सामान्य होते नजर आई स्कूलों में दुकानें खुल गई और वह जो अपने को बड़ा शिक्षा संस्थान विश्वविद्यालय बोलते हैं सबको दीक्षांत समारोह कराने की लत लग गई । बिलासपुर में आज और कल में तीन विश्वविद्यालय में मोस्ट व्हीआईपीओ का जमावड़ा होगा दो के यहां दीक्षांत समारोह एक निजी विश्वविद्यालय में वार्षिक उत्सव अब इन शिक्षा व्यवस्थायों को कौन समझाए कि इन्होंने 2 साल ऐसा क्या किया जिसका उत्सव मनाया जा रहा है। इन्हें शिक्षाविद कहना शब्दकोश के साथ छल है और उपयुक्त शब्द बार-बार शिक्षा व्यवसायिक लिखना शिक्षा क्षेत्र को आइना दिखाना है। दीक्षांत समारोह में बजट खर्च होगा अपनों को काम देने का रास्ता निकलेगा नेता समारोह में आएंगे नई डिल होगी किसी को कुलपति बनना है, किसी को कुलाधिपति, किसी को नई जगह अवसर की तलाश है, तो शोधार्थियों को बिना रिसर्च किए पीएचडी चाहिए। हम इसे डिग्री इसलिए नहीं लिख रहे हैं कि इस का अवमूल्यन पिछले 5 वर्ष में इतना अधिक हुआ है जितना अधिक कभी नहीं हुआ। देश का एक संगठन शिक्षा का पूरी तरह भगवाकरण करने पर लगा है और बहुत सारे स्वयंसेवक रिटायर्ड अंकल इस काम में मददगार हैं दीक्षांत समारोह होंगे वार्षिक उत्सव होगा किंतु एक सच्चाई से सब नजरें चुराते हैं दिखाई देंगे और वह सच्चाई है समाज में बेरोजगारी की हमको विश्वास है किसी भी विश्वविद्यालय के मंच से सामाजिक समरसता और बेरोजगारी पर एक शब्द नहीं कहा जाएगा सभी नए डिग्री धारियों को हम अब शुभकामना भी नहीं दे सकते क्योंकि संघर्ष तो अनवरत है और उसमें उतरने की हिम्मत किसी में नहीं है।