24hnbc बीजेपी के लिए परिवार वादी राजनैतिक दल लोकतंत्र के लिए खतरा, यह सुविधा का सिद्धांत है
Sunday, 10 Apr 2022 18:00 pm
24 HNBC News
24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। परिवार वादी राजनीतिक दलों से लोकतंत्र को खतरा है ऐसा देश के प्रधानमंत्री कहते हैं। परिवार वादी पाटिया और लोकतंत्र के लिए खतरा का सिद्धांत बीजेपी के लिए सुविधा से बनता और बिगड़ता है। देश के बहुत सारे परिवार वादी राजनीतिक दल बीजेपी के साथ हैं तो क्या खतरा नहीं है केंद्र में मंत्री पशुपति पारस लोक जनशक्ति पार्टी, मेघालय कोनरेड संगमा नेशनल पीपल पार्टी, बीजू जनता दल, वाईएसआर ऐसे राजनीतिक दलों के नाम है जो परिवार वादी पार्टियां हैं इसके पहले भाजपा के साथ शिवसेना, अकाली दल, पीडीपी, कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, मुफ्ती मोहम्मद सईद और उनकी बेटी को मुख्यमंत्री बीजेपी ही ने बनवाया है तब यह राजनीतिक दल क्या लोकतंत्र के लिए खतरा नहीं थे लोकतंत्र के लिए असल खतरा एक व्यक्ति के हाथ में अधिकारों का केंद्रीकरण है असीमित सत्ता का केंद्रीकरण विश्वासपात्र वाद को जन्म देता है। व्यक्ति योग्य है या नहीं विश्वासपात्र होना चाहिए जो इन दिनों दिखाई दे रहा है। भारत में लोकतंत्र के कालखंड पर एक बहुत अच्छी पुस्तक है लेखक है क्रिस्टोफ जरोल पुस्तक का नाम है मोदीज इंडिया हिंदू नेशनलिज्म एंड प्राइस ऑफ एथनिक डेमोक्रेसी इस पुस्तक में 1947 के बाद भारत में लोकतंत्र को तीन खंड में बांटा गया है। पहला आजादी के बाद कन्वेंशनल डेमोक्रेटिक 80 के दशक के बाद डेमोक्रेटाईजेशन ऑफ डेमोक्रेटिक और नई सदी के दूसरे दशक में एथनिक डेमोक्रेसी जिसे नस्ली लोकतंत्र कहा गया है। पहले चरण में योग्यता देखकर काम दिया जाता था विश्वासपात्र होना ना होना विशेष मायने नहीं रखता था इसका श्रेष्ठ उदाहरण पंडित जवाहरलाल नेहरु के मंत्रिमंडल में गैर कांग्रेसियों का मंत्री बनना पहला नाम बी आर अंबेडकर का है उन्हें लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद राज्यसभा से लाया गया और देश का कानून मंत्री बनाया गया। क्या एथनिक डेमोक्रेसी में ऐसी कल्पना की जा सकती है दूसरे चरण में देश में सबसे ज्यादा छोटी राजनैतिक पार्टियां बनी लोकतंत्र का लोकतांत्रिक करण हुआ कुलीन तंत्र के रईस परिवारों से निकलकर लोकतंत्र गरीबों पिछड़ों दलितों वंचितों के पास आया देश में बहुत सारे छोटे राजनैतिक दल जो किसी एक परिवार के व्यक्ति के द्वारा शुरू किए गए थे अभी तक चल रहे हैं ऐसा नहीं है कि लगातार सत्ता में हैं। बिहार का राष्ट्रीय जनता दल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है 17 साल से सत्ता से बाहर है तो क्या छोटे राजनीतिक दलों का राजनीति में कोई स्थान ही नहीं है। बीजेपी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ऐसे राजनीतिक दल हैं जिन्होंने हाशिए पर पड़े समूहों की राजनैतिक भागीदारी सुनिश्चित नहीं कि भारतीय जनता पार्टी का तो इतिहास है जिस भी पिछड़े व्यक्ति को राजनीति में कदम रखना हो पहले सेठ की देहरी पर मत्था टेकना पड़ता है। छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश में राजनीति के जानकार इस बात को बखूबी जानते हैं कि किस क्षेत्र में किस जिले में किस मारवाड़ी सेठ के घर पर भाजपा का पूरा लोकतंत्र तिजोरी में बंद है। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह समझना चाहिए कि वे जिस सिद्धांत की बात कर रहे हैं वह उनकी सुविधा अनुसार बनता बिगड़ता रहता है।