24hnbc योग के खिलाडी को अब तेल के खेल में आ रहा है मजा
Wednesday, 06 Apr 2022 00:00 am
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर, 6 अप्रैल 2022।
हम ने ही 2019 में सबसे पहले आपको यह बताया था कि इंदौर देवास स्थित रुचि सोया कंपनी को पतंजलि ने खरीद लिया है । दिसंबर 2017 में एनसीएलटी ने रुचि सोया को दिवालिया घोषित करते हुए इसे बेचने की प्रक्रिया प्रारंभ की थी। करोड़ों के बैंक लोन वाली कंपनी का बुक वैल्यू मात्र 499 करोड़ आका गया और रामदेव यादव के साथ दिल्ली के एक बड़े पत्रकार ने इस कंपनी को खरीद लिया कंपनी अफेयर्स के अनुसार रजत शर्मा इसमें पाटनर थे हालांकि बाद में 6-7-2020 को रजत शर्मा कंपनी के स्वतंत्र निर्देशक के रूप में त्यागपत्र दे चुके हैं। गौर करने लायक बात है कि जिस कंपनी को बैंक करप्ट घोषित कर दिया था उसे खरीदने के लिए रामदेव यादव को एसबीआई ने 12 सौ करोड़, पीएनबी ने 700 करोड़, यूनियन बैंक ने 600 करोड़, सिंडिकेट बैंक ने 400 करोड़ और इलाहाबाद बैंक ने 300 करोड़ का लोन दे दिया । इस तरह 3200 करोड रुपए लोन प्राप्त हो गया और कुछ पैसा अन्य स्रोतों से मिल गया और 499 करोड़ में कंपनी खरीद ली यहां यह जानना जरूरी है कि रुचि सोया 1986 में पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनी थी इसमें 2018 में 2000 करोड़, 2012 में 6000 करोड़ और 2016 में 10 हजार करोड़ का कर्ज था। बस यही से कंपनी का पतन शुरू हुआ और 2017 आते-आते कंपनी दिवालिया हो गई। अब जब कंपनी शेयर मार्केट में लिस्टेड हुई तो 5 माह में ₹17 का शेयर चढ़ते चढ़ते ₹1535 में तब्दील हो गया हालांकि आज इसकी शेयर वैल्यू फिर गिरी है और आज इसका बाजार भाव बी एस इ 767 है। आखिर ₹17 से 1535 का सफर किस तेजडीया ने रचा बल्ले बल्ले पॉलिटिकल चाटुकार पत्रकार रामदेव यादव का साक्षात्कार तो करते हैं, अनुलोम विलोम करते हैं, सिरसासन करते हैं किंतु बाजार में हुए झूठ का पर्दाफाश नहीं करते रामदेव यादव का क्या कहना उसने तो योग से पूछं उगा ली है जिसे कोई पत्रकार नहीं उखाड़ नहीं सकता शायद कुछ खास पत्रकारों के सहलाने के लिए सहेजी गई है । सवाल है जब कंपनी का एफपीओ मार्केट में आया तो नियम अनुसार 25% शेयर पब्लिक को क्यों नहीं दिया गया मात्र 0.82% ही दिया गया है और 98.2% पतंजलि के कब्जे में है। सबको पता है पारदर्शिता का दावा करने वाले मीठे मीठे सब्जबाग दिखाने वाले, 15 लाख दिलवाने वाले, पेट्रोल ₹35 करने वाले, हेक्सा को अपने दोस्त पात्रा के माध्यम से 2 साल पहले ही सोयाबीन तेल के कीमत को 70 से 130 तक ले जाने वाले अब शांति शांति शांति की बात करते हैं।