24hnbc तुम कश्मीर फाइल्स देखो, मैं कुछ और कंपनियां बेच लूं
Tuesday, 22 Mar 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर 23 मार्च 2022। निजी करण डी इन्वेस्टमेंट, मोनेटाइजेशन सबका मिला जूला कर एक ही अर्थ है । पब्लिक अंडरटेकिंग कंपनी जिसे हिंदी में सार्वजनिक उद्यम कहा जाता है को बेचो अब कतार में 23 फिर 29 कुल मिलाकर 50 कंपनियां लग गई है इनमें स्कूटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड तुगभद्रा और एनटीपीसी भी लाइन में है। आप हम सब का लाडला बीएचईएल भी बिकने वाला है एक कंपनी का तो यह हाल है कि उससे जुड़े कर्मचारी उसे 60 हजार करोड का बताते हैं तो सरकार की समिति ने मात्र 18 हजार करोड का वैल्यूएशन किया है । अब ऐसी कंपनी को कौन नहीं खरीदना चाहेगा कुल मिलाकर अवसर कुछ दर्जन हाथों में हैं और काम से बाहर होने वाले करोड़ों में हैं मात्र हस्तशिल्प का काम करने वाले 7 करोड़ लोग काम बंद कर चुके हैं इस क्षेत्र में 15 करोड़ लोग काम करते थे। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 642 मिलियन डॉलर से घटते घटते 620 पर आ गया है और कर्ज 107 लाख करोड़ का है जिसमें से 100 करोड़ देसी कर्ज है जो सरकार कभी वापस ही नहीं करती तब ही तो म्यूच्यूअल फंड के विज्ञापन एलआईसी के विज्ञापन बढ़ते जाते हैं। हर नागरिक को ऐसा बताया जाता है की इन्वेस्टमेंट ही उसका भविष्य है असल में पैसे की जरूरत तो सरकार को है और विदेशी कर्जा चुकाने के लिए देसी कर्ज बेहतर है क्योंकि विदेशी कर्ज डॉलर, पौड़ में चुकाना पड़ता है । पूरी इकोनामी फ्रॉड अर्थव्यवस्था का अद्भुत उदाहरण है। उदाहरण के रूप में एचडीआईएल, रियल स्टेट की कंपनी थी और इस एकमात्र कंपनी ने पंजाब एंड कोऑपरेटिव बैंक को लूटा कंपनी धीरे से स्वयं को दिवालिया घोषित करते हुए एलसीईटी के पास चली गई और यह मामला धीरे से ट्रिबनल के पास चला गया जब आप पीएम के कहने पर मल्टीस्क्रीन में कश्मीर फाइल्स देख रहे थे । एचडीआईएल को अदानी ने खरीदने का इशारा किया देखते-दखते कंपनी का शेयर 55% बढ़ गया और उसका मार्केट कैप 335 करोड का हो गया ऐसी ही 4800 कंपनियां ट्रिबनल के पास हैं जिसमें से 1640 में एलआईसी का पैसा लगता है तभी तो सुबह से शाम तक हर पति पत्नी और बच्चे को समझाया जाता है कि एलआईसी ले लो क्योंकि तुम्हारा पैसा हमको फर्जी कंपनियों पर लगाना है। देश की कुल जीडीपी का 21% कर्ज है जिसमें से 19% विदेशी है और इसे हर हाल में पढ़ाना पड़ता है। कंपनियों के लगातार बिकते जाने से सरकारी खजाना तो भरता है किंतु रोजगार के अवसर तेजी से घटते हैं और यह बात इस तरह समझी जा सकती है कि अब हर कोई व्यक्ति नौकरी की बात नहीं करता सब को उद्योग डालने का स्वप्न दिखाया जाता है। लाभ देने वाली बीएचईएल एरोनॉटिक्स इंडिया लिमिटेड एनएमडीसी इंडियन रेलवे फाइनेंस कारपोरेशन जैसी लाभ देने वाली कंपनियां 6 महीने के भीतर हानी में चलने वाली बना दी गई है। इस तरह कंपनियां बेचकर जो सरकारी खजाना भरा जाता है उसका एक खास हिस्सा सरकार और उसके मुखिया की छबि चमकदार बनाने में खर्च किया जाता है। अगले अंक में प्रिंट मीडिया डिजिटल मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मिलने वाले केंद्र सरकार के विज्ञापनों की बात करेंगे।