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24hnbc नफरत भरी हिंसा का लंबा इतिहास है केवल सत्ता अनुकूल हिंसा पर बात उचित नहीं
Sunday, 20 Mar 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर 21 मार्च 2022। दंगे होते नहीं कराए जाते हैं पहले राजनैतिक दलों को उद्योगपति अपने लाभ में से राजनैतिक चंदा दिया करते थे 2004 से 2013 के बीच मात्र 460 करोड़ का चंदा था। 2013 से 2018 के बीच 2416 करोड़ का चंदा था और 2018 से अभी तक 8000 करोड़ का चंदा हो गया एक बात तो तय है अब कारपोरेट अपने लाभ में से राजनीतक दल को चंदा नहीं दे रहे हैं कहने की कोई बात ही नहीं है कि 2013 के बाद सर्वाधिक चंदा किस राजनीतिक दल को मिला एक तरफ देश की बेशकीमती संपत्तियों को बेचा जा रहा है और दूसरी तरफ कारपोरेट से राजनीतिक दल को चंदा मिल रहा है। सत्ता नफरत, सत्ता अनुकूल मीडिया, संवैधानिक संस्था, सत्ता का कानून शिक्षा क्षेत्र में नया इतिहास जो अंतर्विरोध से भरा पड़ा है। आर्थिक असमानता लगातार छाता अंधकार जब किसी राजनीतिक दल को समझ आ जाए अब इस अंधेरे से निकला नहीं जा सकता तो कश्मीर फाइल जैसी पिक्चरों के माध्यम से नफरत को इतना बढ़ाओ कि जो है वही अच्छा दिखने लगे । भारत में 1947 के विभाजन के बाद नागरिक के तौर पर हमेशा बैठक कर देखा गया पहला दंगा जबलपुर 1954 जिसे आज भी जबलपुर में एक विशेष लोगों को डराने के लिए बोला जाता है "का बे उषा भार्गव हत्याकांड भूल गए या फिर याद दिलाएं", 1961 राउरकेला, 1964 जमशेदपुर, 1968 रांची, 1969 अहमदाबाद, 1974 वर्ली मुंबई हिंसा में 10 लाख नागरिक विस्थापित हुए हम मारे गए नागरिकों की बात ही नहीं कर रहे हैं। 25 जनवरी 1998 वनधामा 25 नागरिकों की हत्या मारे गए व्यक्ति का धर्म नहीं बता रहे हैं। 17 अप्रैल 1998 प्राणकोर्ट 26 की हत्या, 19 जून 1998 चापनारी 25 की हत्या, 2000 अमरनाथ 35 की हत्या, 3 अगस्त 2001 किश्तवार 17 की हत्या, 13 जुलाई 2002 काशीमनगर 29 की हत्या, 6 अगस्त 2002 11 मारे गए अमरनाथ में पुलवामा 24 की हत्या 1998 से 2003 के मध्य 11 बड़े हत्याकांड हुए और यह सब तब हुए जब केंद्र में माननीय अटल बिहारी वाजपेई की सरकार थी और देश कश्मीर डॉक्ट्रिन के अनुसार चल रहा था। 1964 कोलकाता दंगे में 100 की हत्या 10 साल में 12000 मरे 5000 घायल हुए 10000 जेल गए 5 से 7 लाख विस्थापित हो गए असम का ललनी हत्याकांड 1983 1800 प्लस की हत्या, 1980 मुरादाबाद 2500 की हत्या, 1965 से 1998 गुजरात में 630 मौत, गुलबर्ग सोसायटी 2002 69 मरे 39 के शव मिले मुकदमे में केवल 11 हत्या बताई गई । नरोदा पाटिया 28 फरवरी 2002 97 नागरिक मारे गए जो बचने के लिए कुएं में कूद गए उन्हें बाबू बजरंगी और अन्य ने ऊपर से मिट्टी तेल डालकर आग लगा दी हाईकोर्ट ने माया कोडनानी मंत्री को बरी कर दिया गोधरा 2002 97 नागरिक मारे गए , 2013 मुजफ्फरपुर 62 की मौत 200 घायल, 50 हजार विस्थापित 2020 दिल्ली दंगा 50 की मौत जब कुर्सी पर कुर्सी की ऊंचाई से भी नीचे लोग बैठने लगते हैं तो परिणाम यही होता है आज जब नफरत की राजनीति को ब्लोअर लगाकर बढ़ाया जा रहा है तो 21वीं सदी का भारत जिसे कुछ लोग विश्व गुरु बोलते हैं हिंसा की नफरत से भरपूर बन रहा है हम 24 10 की माओलिंचिंग का तो हिसाब ही नहीं कर रहे छत्तीसगढ़ में सुकमा जिले में दर्जनों आदिवासियों को उनकी झोपड़ी सहित जला दिया संबंधित पुलिस अधिकारी अखबार में दम ठोक कर स्वयं को उत्तरदाई बताता है तब भी जांच आयोग उसे बरी कर देता है इन सबके बीच किस किस की फाइल को खोलेंगे किस-किस पर पिक्चर बनाएंगे यदि सत्ता अनुकूल हिंसा के विपरीत फिल्म बन गई तो कितनी पिक्चरों को बेन करेंगे सबसे पहले फिल्म परजनिया का बेन हटा लेते कम से कम तराजू का पल्ला सम पर आता ।