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24hnbc आदिवासी को न्याय मिलना इतना कठिन क्यों .....
Saturday, 19 Mar 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर 20 मार्च 2022। मार्च 2011 सुकमा जिले के 3 गांव में आदिवासी के घरों में आग लगा दी गई थी 5 महिलाओं से बलात्कार तीन ग्रामीणों की हत्या भी हुई थी यह मामला उन दिनों सुर्खियों में था। आज के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 25 अगस्त 2016 के एक पोस्ट में कहा था कि जिम्मेदार पुलिस अधिकारी का रवैया बेहद निंदनीय है और कहीं ना कहीं पूरे मामले मे मुख्यमंत्री डॉ. रमन भी दोषी हैं जो जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर रहे हैं। सीबीआई की एक रिपोर्ट में विशेष पुलिस अधिकारी जिसे उन दिनों एसपीओ कहा जाता था को जिम्मेदार ठहराया था सीबीआई की रिपोर्ट में ना केवल एसपीओ को जिम्मेदार ठहराया बल्कि उस समय के आईजी एसपीआर कल्लूरी को भी जिम्मेदार बताया गया था । अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत हुई जिसमें पुलिस अधिकारियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया आखिर आदिवासी को न्याय क्यों नहीं मिलता। क्या मार्च में जिन्हें 3 गांव में आदिवासी के घर जलाए गए, महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ और हत्या तक कर दी गई वह आदिवासियों ने स्वयं कर ली थी और यदि स्वयं नहीं की थी तो दोषी कहां घूम रहे हैं जांच आयोग सीबीआई, बड़े न्यायिक संस्थानों की निगरानी काम क्यों नहीं आती .... घटना के बाद दो पत्रकारों को घटनास्थल पर नहीं जाने दिया तब पत्रकार उड़ीसा के रास्ते घटनास्थल पहुंचे थे एक महिला पत्रकार तो ट्रक में छुप कर गई थी एक पत्रकार जो स्वयं आदिवासी था लिंगा कोडोपी उसने घटना स्थल का वीडियो बना लिया तो फर्जी मामले में उसे ऐसा फसाया गया कि ढाई साल तक जेल में रहा अभी कुछ ही दिन पूर्व अदालत ने उसे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है । पुलिस की दखलअंदाजी इतनी ज्यादा थी कि दंतेवाड़ा के कलेक्टर आर प्रसन्ना को भी गांव नहीं जाने दिया था जब यह खबर छपी तो आर प्रसन्ना का तबादला हुआ पुलिस अधिकारियों का नहीं.... उसी दौरान समाजसेवी स्वामी अग्निवेश प्रभावित गांव जाना चाहते थे उनकी गाड़ी पर पथराव किया गया कहते हैं पुलिस अधिकारी उस समय आईजी की अगुवाई में इतने ज्यादा गैर जिम्मेदार हो गए थे एससी आदेश पर जांच के लिए पहुंची टीम पर भी एसपीओ ने हमला कर दिया था तब सीबीआई जांच दल को सर्किट हाउस में शरण लेकर जान बचानी पड़ी थी अपनी गाड़ी पर हमला होने और उसमें कल्लूरी का हाथ होने पर एक शपथ पत्र स्वामी अग्निवेश ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया था इतने सबके बावजूद पीपी शर्मा की अगुवाई में बने जांच दल ने पुलिस को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया जबकि सीबीआई टीम पर हुए हमलों में 6 एसपीओ को सेवा से बर्खास्त किया गया था उस समय के अखबारों में तत्कालीन आईजी कल्लूरी ने एक अखबार में बड़ी जिम्मेदारी के साथ आदिवासी की झोपड़ी में आग लगने की जिम्मेदारी ली थी इन सबके बावजूद जांच रिपोर्ट सबको बरी करती है पता चलता है छत्तीसगढ़ में शासन किसी का भी हो न्याय वह भी आदिवासियों को मिलना बेहद कठिन है।