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24hnbc तालापारा क्षेत्र में दो दशक से है किसका राज, विधायक बीजेपी का और निकाय चुनाव जीतती रही कांग्रेस यह कैसा था समीकरण
Wednesday, 02 Mar 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। जस्टिस फॉर नवीन और जस्टिस फॉर बोबडे में एक समानता है दोनों हत्या नशे के साथ हुई तालापारा में भले ही गैंग नाबालिगों की हो किंतु उसके सरदार बालिग हैं । 25 फरवरी हत्या के बाद 2 मार्च को भारतीय जनता पार्टी के पूर्व बिलासपुर विधायक ने पत्रकार वार्ता की बोले 4-5 गुट में बैठी कांग्रेस अपराधियों को दे रही है। संरक्षण राजनीति के जानकार बताते हैं कि बिलासपुर में भले ही भाजपा ने एकछत्र राज किया और 1-2 नहीं 4 बार यहां से भाजपा का विधायक जीता किंतु तालापारा में नगर निगम के चुनाव में हमेशा कांग्रेसी प्रत्याशी जीतते रहे और उनका नेतृत्व जिसके पास रहा वह नाम का भले छोटे हो किंतु राजनीति में हमेशा उसे भाजपा के 1 नेता का समर्थ बताया जाता रहा । पूर्व विधायक की कुछ तो राजनैतिक मजबूरियां रही होगी जिसके चलते उन्होंने कांग्रेस के चार या पांच गुट तो बताएं किंतु असामाजिक तत्वों को संरक्षण देने वाले गुटबाजी नेता का नाम नहीं बताया यदि नाम बता देते तो जनता को पहचानना आसान होता कि 15 वर्षों के भाजपा शासनकाल में इन चार या पांच गुट में से किसे कितनी मजबूती मिली और भाजपा के 15 वर्षीय शासन में कौन इतना मजबूत हो गया कि वह आज पूरे तालापारा में गैंगवार की स्थिति बना रहा है कौन नहीं जानता तालापारा क्षेत्र में कैसे विधानसभा के मतदान में बीजेपी लीड करती रही और निकाय चुनाव में कांग्रेस लीड करती रही इस गुटबाजी का राज सत्यम चौक से प्रारंभ होता है और मगरपारा, तैबा चौक, समता कॉलोनी घूमता हुआ भारतीय नगर चौक से तालाब बेजा कब्जा होते हुए वैशाली नगर चौक से मरही माई मंदिर होते हुए दोबारा मगरपारा चौक पहुंचता है। पिछले विधानसभा चुनाव में वोटों की राजनीति के चलते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की आम सभा मे बिलासपुर विधानसभा के बाहर कराई गई आखिर इतने फायर ब्रांड नेता को भाजपा के किस नेता के इशारे पर नगर निगम क्षेत्र के बाहर रखा गया। राजनीति में जन आंदोलन यूं ही नहीं होते बिलासपुर ने किसके शासनकाल में कितनी हत्या हुई कितने आरोपी पकड़े गए कितने सबूत के अभाव में बरी हुए और पत्रकारिता में किस पत्रकार की सड़क पर हत्या हुई आरोपी आज तक नहीं पकड़े गए जमीनों के घोटाले में कितना आतंक फैला बफ की जमीन कौन खा गया, संभ्रांत परिवार के युवाओं के बीच कैसे एक हत्या मॉल के अंदर हो गई फल स्वरुप कितना बड़ा जन आंदोलन हुआ पुलिस के ऊपर तब भी राजनैतिक दबाव था और उस समय के पुलिस प्रमुख ऐसे किसी भी दबाव से इनकार करते थे। तब तो नगर बंद तक का आवाहन हुआ था पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि कांग्रेस के सभी ग्रुप अपराधियों के सरगना हैं और बिलासपुर की कानून व्यवस्था पर राज्य के सीएम को सीधे हस्तक्षेप करना चाहिए। शहर के ना भूलने वाले बताते हैं की भाजपा शासनकाल में कांग्रेस के एक नेता के गुट ने एक न्यायाधीश के साथ मारपीट कर दी थी तब भी मारपीट करने वाले पुलिस पकड़ से बाहर है तब कांग्रेस के इस गुट को किस का संरक्षण प्राप्त था असल मसला आरोप-प्रत्यारोप लगाने का नहीं है बिलासपुर को एक स्वच्छ, प्रभावशाली, प्रशासनिक प्रमुख की आवश्यकता है जो राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की क्षमता रखें तब ही बिलासपुर के राजनैतिक नेतृत्व को सही दिशा मिलेगी।