सामाजिक कार्यकर्ताओं से मान्यता लेकर करनी होगी पत्रकारिता मृतक, घायल के बयान पर नहीं आरोपी के चेहरे को देखकर तय होती है पुलिस की कार्यवाही...
Tuesday, 01 Mar 2022 00:00 am
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। 25 फरवरी के नाबालिग हत्याकांड ने एक तरफ जहां की पुलिसिंग पर प्रश्न चिन्ह लगाया है, वही दूसरी ओर राजनीतिक दलों से जुड़े युवाओं के तौर तरीकों पर भी सवाल उठा दिए हैं। जिस शहर का नेतृत्व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के हाथ में रहा हो उसे आज यह दिन देखना पड़ रहा है की अपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगने वाले नेता स्वयं को युवाओं का नेतृत्व करता बताते हैं। 25 फरवरी को जिस दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री बिलासपुर में थे उसी दिन तालापारा समता कॉलोनी गार्डन में एक हत्या हुई दो नाबालिगों को उन्हीं के हम उम्र युवाओं ने चाकू मारे उसके पूर्व मृतक को पटक पटक कर मारा भी गया, एक युवा जो फिलहाल मौत से संघर्ष कर रहा है उसके बयान के आधार पर बिलासपुर पुलिस कार्यवाही भी नहीं कर रही है। घायल युवक ने मीडिया को भी जो बयान दिया उसमें भी एनएसयूआई के एक पदाधिकारी का नाम लिया है । एनएसयूआई का पदाधिकारी अपनी सफाई में बिलासपुर एसएसपी को ज्ञापन दे रहा है लिख रहा है कि तालापारा में एक जिला बदर हुआ गुंडा गैंग संचालित कर रहा है और घायल युवक षड्यंत्र के चलते उसका नाम फसा रहा है जबकि वास्तविकता नेता भी जानता है कि तालापारा क्षेत्र में एक नहीं दो गैंग संचालित है और नेता को जब एक गैंग की खबर है तो दूसरे गैंग की खबर कैसे नहीं होगी क्या एनएसयूआई का नेता सब कुछ जान कर भी अंजान बन रहा है। आज इसी संदर्भ में जब कुछ पत्रकार संबंधित थाने पहुंचे थे तो वहीं पर कांग्रेस के कुछ ऐसे नेता भी खड़े थे जिन पर फिलहाल पार्टी अनुशासन की तलवार लटक रही है उन्होंने भी जानकारी लेने आए पत्रकारों से अनावश्यक बहस की बताते हैं ये नेता जो इन दिनों स्वयं को सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं ने कहा कि हम तुम्हें पत्रकार नहीं मानते गोया बिलासपुर में पत्रकारिता के पूर्व इन सामाजिक कार्यकर्ताओं से मान्यता लेनी जरूरी हो। इसी संदर्भ में पुलिस कार्यप्रणाली का दोहरा रवैया भी उजागर होता है । वर्ष 2020 माह दिसंबर में थाना क्षेत्र तोरबा में एक हत्या कांड हुआ था। मृतक के रिश्तेदार ने प्राथमिकी दर्ज कराई और पुलिस ने कुछ ही घंटे के भीतर प्राथमिकी में आए नाम के आधार पर एक उपसरपंच को घर से उठा लिया। 25 फरवरी 2022 को चाकूबाजी में एक युवक की मौत हो गई उसका दूसरा साथी चाकू खाकर घायल अवस्था में हॉस्पिटल में है पुलिस को बयान दे रहा है एनएसयूआई के एक नेता का नाम ले रहा है किंतु पुलिस कार्यवाही करने में इतना वक्त लगा रही है । वैसे भी बिलासपुर के कुछ सामाजिक कार्यकर्ता इन दिनों स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार कर रहे एक अधिकारी के पक्ष में ना केवल खड़े होते हैं बल्कि समाचार लिखने वालों को चमकाते भी हैं।
उलट जो पत्रकार जस की तस लिख देते हैं उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता सरेआम डराते हैं तब यह क्यों ना माना जाए कि गैंगवार की स्थिति केवल तोरबा नहीं सिविल लाइन में भी है और यदि सीधे कहे तो इस स्थिति से बिलासपुर का कोई भी था ना अछूता नहीं है. ...।