24hnbc नाबालिक बच्चे से अवैध ब्रेड फैक्ट्री में लिया जा रहा कार्य शासन के नियमों की उड़ाई जा रहीं धज्जि
Wednesday, 23 Feb 2022 18:00 pm
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समाचार - सरगुजा /अम्बिकापुर
ताजा मामला सरगुजा जिला के अंबिकापुर से लगे गुटखा पारा का है। अवैध ब्रेड फैक्ट्री के संचालक के द्वारा नाबालिक बच्चों से कार्य लिया जा रहा है जो कि तपते हुए रूम में नाबालिक छोटे छोटे दो बच्चे से कम करवाया जा रहा है। एवं उनके जान से खिलवाड़ करके इन बच्चों से कार्य करवाया जा रहा है ना जाने इस ब्रेड फैक्ट्री के संचालक के ऊपर क्या कार्रवाई की जाती है जब नाबालिक बच्चे के हाथों में किताब होना चाहिए उस समय नाबालिक बच्चों के हाथों में ब्रेड का ट्रे पकड़ा दिया गया है आप ही सोचे जो बच्चे घर में कार्य नहीं करते है वो इस तपती हुई अवैध फेक्ट्री में कार्य कर रहे है एक तरफ जहां देश के नौनिहालों को शिक्षित करने के लिए सरकार करोड़ो रुपये खर्च कर रही है। वहीं दूसरी तरफ यहां काम कराने के लिए नौनिहालों के भविष्य से खुले आम खिलवाड़ हो रहा है। सासन को इस अवैध ब्रेड फेक्ट्री की भनक तक नहीं है। वैसे तो बाल श्रम कराना कानूनन अपराध है। लेकिन यहां न तो काम कराने वालों को इसका डर है और न ही करने वालों को। अब देखने के बाद से इस मामले में कार्रवाई होती है या फिर हर मामले जैसे इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है ।
नहीं होती कार्रवाई
क्षेत्र में बालश्रम करवाने वाले लोगों के खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं होती है ऐसे में बाल श्रमिकों की संख्या में भी हर साल इजाफा होता जा रहा है। क्षेत्र में निर्माणाधीन इमारतों व अन्य कार्यों पर बालश्रम धड़ल्ले से चल रहा है। बालश्रम में जुटे बालक व किशोर विद्यालय की चौखट से दूर है। खास बात तो यह है कि बालश्रम चोरी छिपे तो कई जगह होता है, लेकिन शहर में सड़कों पर खुलेआम बालश्रम हो रहा है। यहां से दिनभर में कई अधिकारियों की आवाजाही होती है। इसके बावजूद इनकी नजरे बालश्रमिकों पर नहीं पहुंच रही है।
करवाया जा रहा हैं कठोर कार्य श्रम
मात्र चंद पैसे का झांसा देकर यह लोग बाल श्रमिकों से कठोर श्रम भी करवा रहे है। कानून के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी व्यवसाय में नियुक्त करना या किसी भी तरह का श्रम करवाना अपराध की श्रेणी में आता है ऐसा करने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने का प्रावधान भी है। इसके बावजूद यहां पर इन आयु के बच्चों को अल्प मानदेय का झांसा देकर दिहाड़ी मजदूरी करवाई जा रही है। उन्हें दिनभर मजदूरी के 140 से 170 रुपए दिए जा रहे है। इनसे कार्य करवाने वालों का कहना है कि हम इन बच्चों से कार्य नहीं करवा रहे हैं । क्षेत्र में दिहाड़ी मजदूरी व कठोर श्रम करने वाले अधिकांश बालश्रमिक अन्य जिलों व राज्यों के है जिसमें उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश के बच्चे भी ब्रेड बनाने के कार्यों में लगे हुए है।