24hnbc 21 फरवरी मदर लैंग्वेज डे, सभी मातृभाषाएँ विकास की है पहचान
Monday, 21 Feb 2022 18:00 pm
24 HNBC News
24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। भारत हमारे देश में एक ऐसी समस्या तेजी से आकार ले गई जिस पर हमारे निर्वाचित जनप्रतिनिधि तो संज्ञान ले न सके साथ ही भाषा विदों ने भी ध्यान नहीं दिया। शायद यही कारण है कि देश में 197 भाषाएं इनडेंजर है । और इस सूची में हम विश्व में पहली पायदान पर खड़े हैं । यूनेस्को के अनुसार विश्व में 2500 भाषाएं इनडेंजर है जिसमें से 197 के साथ भारत, यूएस 191, ब्राजील 190, चीन 144, इंडोनेशिया 143 के साथ है । 21 फरवरी के दिन हम इंटरनेशनल मदर लैंग्वेज डे मनाते हैं, यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को यह निर्देश दे रखा है कि वह 21 फरवरी को इंटरनेशनल मदर लैंग्वेज डे मनाएगा। भारतीय संविधान इस मामले में काफी सुलझा हुआ नजर आता है आर्टिकल 29 भाषाओं को संरक्षण देने के लिए ही बना है यह आर्टिकल अपने आप में पूर्ण है इसे रोका नहीं जा सकता जबकि मौलिक अधिकारों का स्थगन किया जा सकता है कोई भी भाषा तब इनडेंजर आ जाती है जब उसके बोलने वाले 10 हजार से कम हो जाते हैं। भारत में 17 वर्ष में 220 भाषाएं समाप्त हो गई और हम इन्हें बचाने के लिए कुछ करते नजर नहीं आए। नागरिकों को यह जानना चाहिए कि हमारे संविधान ने किसी एक भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया है शेड्यूल 8 में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है इसमें से हिंदी 4थें स्थान पर और संस्कृत 14वें स्थान पर है । शासन समय-समय पर भाषाओं के संरक्षण के लिए नियम बनाता रहता है संविधान के अंतर्गत ही छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण के लिए नियम बने इसी तरह तेलंगाना में उर्दू फर्स्ट लैंग्वेज है, 1961 में देश में त्रिभाषा फार्मूला लागू हुआ राज्य सरकारों ने इसके साथ इस तरह छेड़छाड़ की की कुछ भाषाओं का विकास ही रुक गया कई लोग समझते हैं कि उर्दू मुसलमानों की भाषा है जबकि ऐसा नहीं है उर्दू हिंदुस्तान की भाषा है। पाकिस्तान में तो 45% लोग पंजाबी बोलते हैं, मतलब पाकिस्तान की भाषा भी उर्दू नहीं है। भाषा के आधार पर देश बन सकते हैं, मजहब के हिसाब से बनाना गलत है। इसका बड़ा उदाहरण बांग्लादेश है 1947 में पाकिस्तान बना और भाषा के आधार पर ही बाद में बांग्लादेश का निर्माण हुआ कारण पाकिस्तान के द्वारा भाषाओं के साथ उचित न्याय न कर पाना भी एक कारण है आज देश में " नेशन वन लैंग्वेज" की बात भी हो रही है जो कि हो ही नहीं सकता। उर्दू तहजीब है, तौर तरीका है, सलीका है उर्दू खत्म हुई तो हिंदी साहित्य का प्रवाह बाधित हो जाएगा इन दिनों जिस तरह से भाषाओं को लेकर संकुचित मानसिकता देखी जा रही है यह उचित नहीं है सभी भाषाओं का ज्यादा से ज्यादा विकास हो इसी में संस्कृति सभ्यता का विकास हुआ है।