24hnbc दर्रीघाट क्षेत्र में भूमि घोटाले के पीछे का सच
Thursday, 03 Feb 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर/मस्तूरी। जमीनों की अवैध तरीके से बिक्री के लिए बिलासपुर में कैसे-कैसे षड्यंत्र होते हैं इसका एक उदाहरण मस्तूरी ब्लाक का दर्री ग्राम पंचायत है । क्षेत्र पंचायत हल्का नंबर 25 में आता है, भूमि स्वामी यह जानता है कि खसरा नंबर 77/3, 113/17 और 20/3 उसकी भूमि जितनी थी उसे उसने स्वयं बेच लिया है। षड्यंत्र का पहला फेज 2021 में हुआ जब कीर्तिवर्धन नामक व्यक्ति की अगुवाई में बिलासपुर आईजी को भाड़े की भीड़ लाकर महमंद ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि नागेंद्र राय पर आरोपित किया गया कि क्षेत्र की महिलाएं उनके आतंक से त्रस्त है। जबकि वास्तविकता इससे भिन्न है। महमंद क्षेत्र में महिलाओं ने नागेंद्र राय की प्रेरणा से मोर्चा बनाया और क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री व नशे के खिलाफ मोर्चा खोला नागेंद्र राय और सतनामी समाज के सेवक टांकेश्वर पाटले की विशेष भूमिका का ही परिणाम था कि मस्तूरी क्षेत्र में पुलिस का सायबर मितान का जागरूकता कार्यक्रम सक्रिय हुआ और प्रत्येक थाना क्षेत्र में साइबर मितान बने।
2021 में कीर्तिवर्धन का प्रायोजित ज्ञापन 2022 में भी छपता रहता है सत्ताधारी पार्टी की बिलासपुर जिला ग्रामीण इकाई में ब्लॉक अध्यक्षों का चयन भी इसी बीच हुआ यदि नागेंद्र राय की छवि महिलाओं के बीच वास्तव में दागदार और आतंकी है तो उन्हें मस्तूरी ब्लॉक का अध्यक्ष क्यों बना दिया गया। यहीं से लगता है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर ही एक पक्ष नहीं चाहता कि मस्तूरी में कांग्रेस का संगठन खड़ा हो, ज्ञापन के बाद ही दिसंबर 2020 के अंतिम सप्ताह में महमंद चौक पर हुई एक हत्या कांड में भी उन पर गोली चलाने की नामजद रिपोर्ट हुई घटना 8:00 बजे की है एफआईआर रात्रि 4:00 हुई एफआईआर झूठी है, को लेकर ग्रामीणों ने आंदोलन किया ग्रामीणों का नेतृत्व टांकेश्वर पाटले ने किया कुछ हीं घंटे में हत्याकांड का शिकायतकर्ता ने बयान बदला नागेंद्र राय के संदर्भ में शपथ पत्र दे दिया कुछ दिन बाद नागेंद्र राय को मस्तूरी का ब्लॉक अध्यक्ष घोषित किया गया और टांकेश्वर पाटले जिला ग्रामीण सचिव बने।
2021 में टांकेश्वर पाटले के घर पर हमला हुआ हमलावर घर के अंदर घुस गए पाटले कहते हैं कि हमला सुनियोजित था। 2022 में उन्हीं के घर पर डकैती हुई टांकेश्वर कहते हैं वह सतनामी समाज के हैं उनका लोकप्रिय होना कुछ पुराने षड्यंत्रकारी नेता को रास नहीं आता इसी बीच दर्री की 77/3, 113/17 और 20/3 की भूमि 6 टुकड़ों में बिक गई इतना ही नहीं दर्री में 150/18 की भूमि पट्टे की थी उसका भी नियम विरुद्ध तरीके से डायवर्सन हो गया और एक कांग्रेसी नेता का पुत्र यहां देवरीखुर्द क्षेत्र के एक भाजपाई पार्षद का साझेदार बनकर भूमि को टुकड़ों में बेचने लगा, लगता है कि राजनीति का मार्ग वैसा आसान नहीं जैसा बाहर से लगता है।