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24hnbc न सामरिक सुध ना कूटनीति गणतंत्र की बधाई
Wednesday, 26 Jan 2022 00:00 am
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। 26 जनवरी 2022 हम अपना 73 वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं हमेशा के समान कहा जा सकता है कि हमारे सामने बहुत सारी चुनौतियां हैं और हम उन सब पर विजय पा लेंगे लेकिन इस बार यह 2 वाक्य औपचारिक नहीं है। भारत देश की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन दिनों जितनी कमजोर हुई है उतनी कमजोर पूर्व में कभी नहीं रही ना सामरिक सुध ना कूटनीति गणतंत्र दिवस की बधाई पढ़ने में खराब लगता है। देश अपनी बदहाली अपने सियासी गृह युद्ध में ऐसा खोया है न दुनिया में भारत का मतलब बचा और न वह खुद मतलब बनाने की हैसियत में है। चीन की सीमा 14 देशों से लगती है 22000 किलोमीटर सीमा में से भारत के साथ उसकी सीमा साढ़े 3 हजार किलोमीटर की है इसमें भूटान को और जोड़ दें तो यह 4000 किलोमीटर हो जाती है। चीन ने हाल ही में अपनी नई रक्षा नीति घोषित की है और उस पर वह कठोरता से चल रहा है हमारे यहां हालत यह है कि सीडीएस की मृत्यु हुए डेढ़ माह से अधिक हो चुका किंतु नई नियुक्ति नहीं हुई है भारत में डिफेंस प्लानिंग कमेटी की अंतिम मीटिंग मई 2018 में हुई थी उसके बाद आज तक नहीं हुई दक्षिण एशिया, हिंद प्रशांत क्षेत्र या विश्व राजनीति में भारत की आज क्या भूमिका है वह किसके साथ है उसके साथ कौन हैं। दक्षिण एशिया व आसियान देशों में चीन सर्वत्र छाया हुआ है और हमारा चुनाव 250 कैराना छोड़कर चले गए लोगों पर हो रहा है हमारे टीवी चैनलों के डिबेट में वे 40000 लोग स्थान नहीं पाते जो देश छोड़कर चले गए। हम या हमारे हुक्मरान डंके की चोट पर 100 साल के प्रतीक और अतीत के सम्मान की धरोहरों को नया इतिहास लिखने के नाम पर समाप्त कर रहे हैं यही हमारा वह एजेंडा है जो ना केवल हमको अतीत से काटता है बल्कि वर्तमान की समस्या से भी दूर करता है इसी दौरान 1949 में बना राष्ट्रीय संग्रहालय जिसमें 5000 साल पुराने ऐतिहासिक महत्व के सामान रखे हैं समाप्त हो जाएगा। राष्ट्रीय अभिलेखागार जहां पर 25000 दुर्लभ पांडुलिपि हैं समाप्त हो जाएगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र उपराष्ट्रपति का भवन, शास्त्रीय भवन, कृषि भवन, विज्ञान भवन, उद्योग भवन समाप्त हो जाएंगे भारत के पड़ोसी देशों में भारी सामारिक कूटनीतिक हलचल हो रही है लेकिन भारत सक्रिय नहीं हैं। मानो हमारे पास तंत्र ही नहीं है शेयर मार्केट क्रैश कर गया हमें चिंता नहीं है हमारे बैंक में ब्याज दर इतनी कम हो गई कि विदेशी निवेशकों ने अपना पैसा भारत से निकालकर अमेरिकी शेयर मार्केट में लगा दिया किंतु हमारी छाती है कि घमंड से फूली जा रही है हमारे डिबेट रोज ओबीसी 80 -20 के बीच ही अटके पड़े हैं ज्यादा होता है तो हम उद्योग लगाने के स्थान पर नेताओं की मूर्तियां लगाने की होड़ में लग जाते हैं कहते हैं कि इतिहास दुरुस्त कर रहे हैं इतिहास दुरुस्ती करण के साथ हम अपने वर्तमान को और साथ में भविष्य को इस बुरी तरह खराब कर रहे हैं कि आने वाला समय और पीढ़ी कभी हमें क्षमा नहीं करेगी । हमारे देश में रोजगार के अवसर तेजी से समाप्त हो रहे हैं विनिवेश के नाम पर हम अपना घर बार बेचकर दिवाली मना रहे हैं हम देख चुके हैं कि लॉकडाउन में मंदिरों की कमाई तक बंद हो गई उसके बाद भी हमें लगता है कि मंदिर बनाने से लाभ होगा और हम मंदिर बना रहे हैं उद्योग के नाम पर 10000 से 25000 का शिशु लोन बाटकर दावा करते हैं की 7 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जबकि वास्तविकता यह है कि देश के हर जिले में 145000 से लेकर 200000 तक युवा रजिस्टर्ड बेरोजगार हैं। प्रबुद्ध पाठक व्हाट्सएप ज्ञानी स्वयं अपने मोबाइल को कष्ट दे और यह जानने के लिए कि देश में कुल जिलों की संख्या कितनी है ना की वायरल किए गए हिंदू मुस्लिम डिबेट का अंधा अनुकरण कर स्वयं वायरल करें। दिल्ली से लेकर छत्तीसगढ़ तक हिंदू राष्ट्र बनाने के नाम पर जो सामाजिक वैमनस्य बढ़ाया जा रहा है उसको रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं गंभीरता से देखें अन्यथा यहां हम दीया जलाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते रहेंगे वही हमारी सरहदों पर पड़ोसी देश घुसते चले जाएंगे