24hnbc जनता ने जिताया है शैलेश को और वे उसी के विधायक बनकर दिखा रहे हैं
Friday, 21 Jan 2022 18:00 pm
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। बिलासपुर जिले की विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों में भी बिलासपुर के विधायक एक कुशल नट के समान चल रहे हैं और उन्होंने अब तक के कौशल से स्वयं को जनता का विधायक बना कर रखा है। यह अचीवमेंट बड़ी उपलब्धि है इसके 2 मायने हैं। पहला विधायक की जीत जनता की जीत थी दूसरा अमर अग्रवाल के खिलाफ 2018 का चुनाव जनता ने लड़ा था और जनता ने ही अमर अग्रवाल के खिलाफ अपनी पसंद शैलेश पांडे को जिताया था और इसी बात को शैलेश पांडे ने समझा और जनता से रिश्ता कभी टूटने नहीं दिया वे अब तक तो जनता के दिल पर राज करते हैं। लंबे समय तक शहर की राजनीति पर कब्जा रखने वाले भाजपा के कद्दावर नेता के बंगले पर कांग्रेसी नेता खूब आते जाते दिखते थे कहते थे विधायक तो जनता का है ऐसे में यदि आम आदमी शैलेश पांडे के घर जाता है तो कांग्रेसी नेताओं को बुरा नहीं मानना चाहिए और याद रखना चाहिए कि जनप्रतिनिधि होते हुए उन्होंने भी अमर अग्रवाल के बंगले के चक्कर खूब कांटे हैं। बिलासपुर का शायद ही कोई कांग्रेसी नेता रहा होगा जो अपने काम लेकर अमर अग्रवाल के बंगले नहीं गया और अमर अग्रवाल पर तो आरोप यहां तक लगता था कि उनके बंगले पर कांग्रेसियों के काम आसान है वनस्पत भाजपाइयों के, आंकड़ों की बात करें तो 2013 के चुनाव में अमर अग्रवाल को 72255 वोट मिला हारी हुई प्रत्याशी कांग्रेस के वाणी राव को 56656 वोट मिला और अमर अग्रवाल 15599 वोट से जीते , वही 2018 के चुनाव में शैलेश पांडे को 67896 वोट मिला अमर अग्रवाल को 56675 वोट मिला । इस चुनाव में कुल 29 प्रत्याशी मैदान में थे तीसरी स्थिति हासिल करने वाले बृजेश साहू को 3641 वोट मिला था जबकि 2013 में तीसरी स्थिति मे 3669 वोट में नोटा था 2013 के परिणाम में नोटा 3669 नहीं है यह दिखा दिया था कि अमर अग्रवाल जनता की पसंद तो नहीं है जनता को वोट देने के लिए एक सही चेहरे की तलाश थी और वह तलाश 2018 में समाप्त हो गई। ऐसे में शैलेश पांडे यदि जनता के नेता बन कर दिखा रहे हैं तो वह सही कर रहे हैं क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही भगवान हैं। अब चर्चा करें शहर के हालात की लगातार गिरती हुई कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन हैं कौन चेहरे हैं जो सिविल लाइन, सरकंडा, तोहफा, तारबहार, कोतवाली जैसे थानों में गुंडागर्दी करते देखे जा सकते हैं। कुछ ही दिन पूर्व सिविल लाइन क्षेत्र के दो नामचीन चेहरों के बीच गैंगवार की तर्ज पर झगड़ा हुआ और यह झगड़ा कोई आज का नहीं अमर भैया के काल से चला आ रहा है अंतर यह है तब मेडी को एक भाजपा नेता का आशीर्वाद प्राप्त बताया जाता था । अकबर तब भी अकबर था आज भी अकबर है असल में जब तक शासन ऐसे गुंडा तत्वों का राशन लाइन नहीं कटेगी तब तक इन पर नियंत्रण नहीं हो सकता कहा जाता है कि राशन लाइन का सबसे बड़ा पाइप तो कानून व्यवस्था की तरफ ही खुलता है । तब ही तो असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद रहते हैं फिलहाल अपन बात शहर के विधायक की कर रहे हैं 26 जनवरी को आने में कुछ ही दिन शेष हैं इस बार जिस संसदीय सचिव को बिलासपुर गणतंत्र दिवस के ध्वजारोहण के लिए भेजा गया है वह गूटीय संतुलन के हिसाब से मुख्यमंत्री गुट का बताया जाता है । पहली बार चुनाव जीतकर विधायक बने हैं कुछ दिन पूर्व असम चुनाव में कांग्रेस की वाट लगा चुका है और आजकल उत्तर प्रदेश में व्यस्त दिखाई देते हैं जहां पर कांग्रेस को प्लस ही होना है क्योंकि मायनस पर तो शुरु से थी। लिहाजा विकास भैया का ट्रैक रिकॉर्ड खराब नहीं होने वाला बिलासपुर जिले की एकमात्र संसदीय सचिव को इस बार कहीं ध्वजारोहण का काम नहीं मिला क्या इसे भी कांग्रेस के पदाधिकारी असंतोष की नजर से देखेंगे।